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पद्य

नौकरिहा दामाद
आंचलिक बोली, कहानी

नौकरिहा दामाद

प्रीतम कुमार साहू 'गुरुजी' लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** (छत्तीसगढ़ी कहिनी) गाँव के गउटियाँ कहत लागें दुकलहा करा कोनो जिनिस के कमी नइ रिहिस। खेत, खार, धन दउलत, रुपिया, पइसा सबों जिनिस रिहिस। सादा जीवन उच बिचार के रद्दा म चलत दुकलहा अउ दुकलहिन मजा म जिनगी बितावत रहय। फेर संसो के बात ए रिहिस कि उँकर एके छिन बेटी चँदा जेकर बर नौकरिहा सगा देखत-देखत चार बछर होगे रिहिस। चँदा के उमर चालीसा लगे बर दु बछर कम रिहिस। सगा मन ठिकाना नइ परत रिहिस। ऐसना बेरा म पचास एकड़ खेत के जोतनदार बने रोठहाँ सगा धर के सुकलहा हर अपन मितान दुकलहा करा आनिस। फेर दुकलहा हर ये कहिके सगा मन ल मुँहाटी ले लहुँटा दिस के लइका के कुछु नौकरी चाकरी नइ हे कहिके। मोर बेटी ह अतेक पढ़े लिखे हे त नौकरिहा दामाद होना चाही। पाछु सुकलहा हर कहिस घलोक देख मितान खेती किसानी का नौकरी ले कम आय ! मनखे के चाल चलन अउ चरित ह ...
एक युग, एक विचार
कविता

एक युग, एक विचार

रूपेश कुमार चैनपुर (बिहार) ******************** ग्वालियर, मध्यप्रदेश की पावन धरा ने जन्म दिया एक बालक को, नाम हुआ अटल, स्वरों में कविता, शब्दों में सत्य, वाणी थी सरल, मन प्रखर, अडिग, स्थिर, निर्मल। पिता शिक्षक संस्कारों की छाया, माँ की ममता, राष्ट्र का स्वप्न, बाल्यकाल से ही चेतना जागी, भारत बने विश्व में उज्ज्वल स्वर्ण-रत्न। कलम उठी तो कविता बह चली, राजनीति आई तो सेवा बन गई, विचारों में मतभेद रहे होंगे, पर मर्यादा कभी न टूटी, न झुकी, न गई। जनसंघ से संसद तक की यात्रा, संघर्षों से रचा हुआ इतिहास, एक नहीं, कई बार पराजय मिली, पर हर हार बनी भविष्य का प्रकाश। “हार नहीं मानूँगा” कहने वाला, स्वयं उस पंक्ति का प्रमाण था, लोकतंत्र का सच्चा प्रहरी वह, विपक्ष में भी जिसकी वाणी समाधान था। तीन-तीन बार बने प्रधानमंत्री, पर सत्ता कभी सिर पर न चढ़ी, सरल ज...
तैयारी जीत की
कविता

तैयारी जीत की

अशोक कुमार यादव मुंगेली (छत्तीसगढ़) ******************** नया साल बड़े ही धूमधाम से मनाना है। कुछ पाने के लिए, कुछ कर दिखाना है।। जीत होगी या हार होगी, मत सोचो तुम, हर हाल में मंजिल के शिखर तक जाना है।। जब तक साँसे चल रही है, तुझमें भी है दम। कई बाधाएँ आएँगी, रुक मत, बढ़ा कदम।। गिरकर फिर उठ, संभाल अपने आप को, आँधी और तूफान बन, वज्र का बना बदन।। छद्मरूप त्याग कर, भाग्य का लिखा बदल। नये ज्ञान-विज्ञान से, जीवन में ला हलचल।। असंभव को संभव कर, तू कुछ बन सकता है, विद्या प्रकाश पुस्तक में ध्यान लगा हर-पल।। अंतर्मन की ज्वालामुखी को, ज्ञान से धधका। अपने आप को लक्ष्य से कभी भी मत भटका।। तू है धुरंधर, अंधाधुंध कर परीक्षा की तैयारी, अंतिम में मिलेगी कामयाबी, कर्म में मन लगा।। परिचय : अशोक कुमार यादव निवासी : मुंगेली, (छत्तीसगढ़) संप्राप्ति : शिक्षक एल. बी., संस्थापक एवं अध्यक...
कलयुग
कविता

कलयुग

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** आज के युग मे मानो कलियुग प्रगट हो गया है, लगता है कोई बुरा समय एक आकर लेकर दुनिया पर छा गया है ! चारों ओर अशांति विद्रोह और भय व्याप्त हो गया है, विचारों में जहर और व्यवहार में आक्रोश हृदय में घर कर गया है ! गलत को सही साबित करने की कला आ गई है, झूठ को सच का मुखौटा पहनने का हुनर आ गया है ! पाप-पुण्य के मायने बदल गए हैं हर इंसान स्वार्थी हो गया है ! कलयुग कोई तिथि या युग नहीं जब अनाचार- मन और विचारों में मे व्याप्त हो जाए, वही कलयुग अवतरित हो जाता है ! ये मन के पापों की एक अवस्था है, जो सब कुछ तहस नहस कर देता है, पाप समाज में नहीं इंसान के भीतर जन्म लेता है और वही विचार कर्म बनते है ! कलयुग की स्तिथि से हमको स्वयं से ही बाहर निकलना होगा, करुना और प्रेम का मार्ग पकड़ना होगा, ...
अधूरे ख्वाबों के पार जाना है मुझे
कविता

अधूरे ख्वाबों के पार जाना है मुझे

सुशी सक्सेना इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************** अधूरे ख्वाबों के पार जाना है मुझे दिल जो चाहे चांद तो, पाना है मुझे। जी लिए बहुत इस दुनिया के लिए खुद से किया वादा भी तो, निभाना है मुझे। मंदिर मस्जिद में पूजूं ये हसरत नहीं इक मूरत प्रेम की दिल में, बिठाना है मुझे। राहों में गिरेंगे और संभालेंगे भी कभी जिंदगी के सफर को यादगार बनाना है मुझे। परिचय :- सुशी सक्सेना निवासी : इंदौर (मध्यप्रदेश) इंदौर (मध्यप्रदेश) निवासी सुशी सक्सेना वर्तमान में, वेबसाइट द इंडियन आयरस और पोगोसो ऐप के लिए कंटेंट राइटर और ब्लॉग राइटर के रूप में काम करती हैं। आपकी कविताएं और लेख विभिन्न पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए हैं। आपने कई संकलनों में भी योगदान दिया है एवं कई प्रशंसा पत्र और पुरस्कार प्राप्त किए हैं। विशेष रूप से, आपको अनुराग्यम द्वारा गोल्ड मेडल एवं वंदे ...
नववर्ष
कविता

नववर्ष

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** नववर्ष जगा देगा फिर से, जीवन में टूटी उम्मीदों को। वादा कर लेगा हताशा से, व्यक्ति सपने पूरे करने को। प्रफुल्लित होगी मन मयूरी, रंग चढ़ेगा आशा किरणों को। पल्लवित होगा हृदय चमन, यूं हौसला मिलेगा कदमों को। फिर जज्बा जगेगा अंतस में, कर्मठ बांध लेगा मुट्ठियों को। आस को परवाज मिलेंगे फिर, कसूमल रंग नव खुशियों को। सुदूर क्षितिज से राह मिलेगी, कमर कसे चल पड़ेंगे लक्ष्य को। अब सुलझेंगी उलझी गुत्थी, नवल उमंग मिलेगी कर्मों को। जोश जुनून उम्मीद उत्साह, पुनर्जीवित हुये सब नव वर्ष को। सुखी जीवन वेदना होगी दूर, परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है...
खाली हाथ आये
कविता

खाली हाथ आये

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** खाली हाथ आये है खाली हाथ जाना है। फिर क्यों संसार में बटोर कर अपना वक्त गवाना है। ******** खाली हाथ आये है जरूर पर खाली हाथ नहीं जायेंगे। अच्छे कर्म कर कर लोगों की दुआए ले जायेंगे। ******** जितना ही हम एकत्र करेंगे सब यहाँ रह जायेगा। केवल कर्म का पिटारा हमारे साथ जायेगा। ******** अब जोड़ो मत बांटना शुरू करो। अपनी ज़िन्दगी को खुशियों से भरो। ******* सबसे अच्छा व्यवहार करो सबके काम आओ। सबकी करो भलाई दुनिया में यही यश कमाओ। ********* जब आप नहीं रहेंगे लोग आपका व्यवहार याद करेंगे। और आप मृत्यु के बाद भी लोगो के दिलों में आप ज़िंदा रहेंगे। ******** अब संचय को छोड़कर प्रभु वंदन में लग जाओ। और इस दुनियां के सब सागर से तर जाओ। ********* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार-२ ...
पत्थरों पर उकरे हुए हैं कई सवाल
कविता

पत्थरों पर उकरे हुए हैं कई सवाल

शिवदत्त डोंगरे पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) ******************* पत्थरों पर उकरे हुए हैं सदियों से कई सवाल हर किसी ने वक़्त के सीने पे अपना हाल उतारा है। किसी ने शिलालेख में गुदवा दी अपनी दास्तां, किसी ने काग़ज़ की पनाह ली, कुछ हवाओं से कह गए दिल का हाल, किसी ने फूलों को अपनी कहानी सुना दी, चाँद के पास भी होंगे अनगिनत फ़साने, रात की खामोशियाँ… ये खामोश खड़े पर्वत-पठार, दरख़्त और समंदर की नम रेत में, कोहरे में भीगी घास की नमी और पत्तियों की सरसराहट में किसी ने नदियों को सौंप दिए होंगे भावनाओं के अधजले ख़त, कोई सागर की लहरों में अपने अरमान बहा गया होगा, और कहीं झरनों की फुहार में अपने अधूरे सपने भिगो दिए होंगे सन्नाटों में भी कुछ गूंज रहे होंगे अनकहे गीत, कुछ शिशिर की हवाओं में अपने राज़ छोड़ गए होंगे, पवन की सरसराहट में सूरज की पहली किर...
छत्तीसगढ़िया दिलवाला होथे
आंचलिक बोली, कविता

छत्तीसगढ़िया दिलवाला होथे

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** (छत्तीसगढ़ी बोली) हम वो करम करबो जउन इंसानियत अउ मानवता बर जरूरी हे, बाकी हर हमेशा हम देखत हन हमर घेंच म हर बेरा लटके छुरी हे, ए सब करे बर न कोनो देबी चाही न कोनो देवता, हमर अपन छत्तीसगढ़िया परब आय छेरता, जिहां अपन उपज के खुशी म सगरो मिलजुलके मनाथन तिहार, एही म हमर जीत अउ एही म हमर हार, जीत एखर बर के हम दिलवाला हन, हार एकर बर नइ दिखय चढ़ाय जालापन, एमा काखरो कोनो योगदान नइ हे, सब दान करत हन अइसना हमर हिरदई हे, मुठी भर अन्न अउ पेट भर खाना, सदा दिन ले करत आत हे छत्तीसगढ़िया दीवाना, जतको कमाएन पायेन, जादा रहय चाहे कम अपन बर हाथ बढ़ायेन, छेरछेरा कोनो धार्मिक तिहार हे न कोनो सामाजिक, हमर हिरदे ले जुरे तिहार हे वास्तविक, त आवव तिहार खुलके मनावव, छत्तीसगढ़िया मन दिलवाला होथे सबो ल बतावव। ...
विरह का सन्नाटा
कविता

विरह का सन्नाटा

बाल कृष्ण मिश्रा रोहिणी (दिल्ली) ******************** सूरज छुपा धुँध के पीछे, आँखों में ठहरा आसमान। इस अकेलेपन की रात में, दिल ढूँढ रहा तेरे निशाँ। शहर सो गया, नींद के आगोश में, मेरा जहाँ बस तेरी यादों में सिमटा। चीख़ रहा अंदर सन्नाटा, बाहर का मौसम बदला। हर साँस में बस तेरी खुशबू, हर धड़कन पे तेरा पहरा। सन्नाटों में तेरा साया, नींद के आगोश में, शहर समाया। धुंधले हुए हैं रास्ते सारे, कैसे ढूँढूँ मैं अपनी डगर? खो गए हैं सारे सहारे, कहाँ ले जाएगा यह सफ़र? ख़ामोशी ने शोर मचाया, दिल ने फिर खुद से की उलझन। टूटे सपनों की राख तले, दबी हुई है मेरी चुभन। क्यों थम न जाता ये जीवन, थक-सा गया हर एक क्षण। चाँद भी आज बादलों का, ओढ़कर आया है कफ़न। परिचय :- बाल कृष्ण मिश्रा निवासी : रोहिणी, (दिल्ली) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुर...
संस्कृत है हिंदी की जननी
कविता

संस्कृत है हिंदी की जननी

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** संस्कृत है हिंदी की जननी यही भारत माता की पहचान। विश्व भौतिकवाद से परे हमारी हिंदी। कई सुरों से निकाल कर, जन-जन के अंतर मन का भाव है हमारी हिंदी। भारत माता के इस भाव का तिलक करें, इसका सम्मान करें। तुलसीदास, सूरदास कई ऋषि मुनियों की लेखनी हमारी हिंदी। अंतर मन के भाव जागृत कर सारे जग को ज्ञान हमारी भाषा देती। हृदय से मिलाकर एक रखती, पर चिंता यही अंग्रेजी भाषा अब खंड-खंड कर चीर हरण कर रही। करें प्रतिज्ञा हर दिन हर पल हिन्दी दिवस मनाकर, अपनी भाषा का सम्मान बढ़ाना है। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आपको प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना, कृपया...
हिंदी हमारी शान है
कविता

हिंदी हमारी शान है

संजय वर्मा "दॄष्टि" मनावर (धार) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना हिंदी हमारी शान है हमको इस पर अभिमान है सीधी इसकी तान है, यही तो इसकी पहचान है। अंग्रेजी को मत घोलो बोलना है तो शुद्ध हिंदी बोलो हिंदी में ही कार्य करों भाषा सम्मान पर उपकार करो। वतन है हिन्दोस्तां हमारा हिंदी बोलने से लगता प्यारा हिंदी वैज्ञानिक भाषा है बोलो इससे ही तो जगत सारा। धर्मनिरपेक्षता की हर जुबान पर बैठा जीवन सारा है बोलो हिंदी लिखो हिंदी, पढ़ो हिंदी सब यही तो नारा है। परिचय : संजय वर्मा "दॄष्टि" पिता : श्री शांतीलालजी वर्मा जन्म तिथि : २ मई १९६२ (उज्जैन) शिक्षा : आय टी आय निवासी : मनावर, धार (मध्य प्रदेश) व्यवसाय : ड़ी एम (जल संसाधन विभाग) प्रकाशन : देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ व समाचार ...
हिंदी हिन्द की पहचान
कविता

हिंदी हिन्द की पहचान

सौरभ डोरवाल जयपुर (राजस्थान) ******************** हिंदी हिन्द की पहचान, हिन्दोस्तां की आन, बान और शान।। संस्कृत की छोटी बहन, सभी भाषाओ की मौसी है कहलाती, हिन्दुस्तान की सभी क्षेत्रीय भाषाएँ हिन्द की गोद में ही आश्रय पाती।। हिंदी ने जोड़ा सभी भाषाओ को, माला के मोतियों के जैसे, बिना हिंदी भारत की कल्पना कैसे हो सकती है वैसे ? हिंदी भारत का अभिमान है, हिंदी ही काव्य का प्राण है।। परिचय : सौरभ डोरवाल निवासी : भोजपुरा, जिला- जयपुर (राजस्थान) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आपको प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना, कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपन...
अनमोल जीवन
कविता

अनमोल जीवन

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** यह जीवन बड़ा अनमोल है, पुण्य कर्मों का मेल है, जीने की यही तमन्ना है कुछ कर गुजरने की मंछा है। काम कुछ करना है नाम कुछ करना है, व्यर्थ ना चले जाए नहीं तो हाथ मिलना है, मैं कुछ ऐसा लिखूं जो इतिहास बन जाए, इतिहास के पन्नों पर नाम अमर हो जाये, मुझे तो जिंदा रहना है। शिक्षा गरीबी नारी पीड़ा समाज सुधार पर बात बने, मै नींव का पत्थर बन जाऊं, दबकर भी कुछ करना है, मुझे तो जिंदा रहना है। राजनीति नहीं मेली हो, भ्रष्टाचार का नाम ना हो, मेरी कलम भी तलवार बन जाये, कुछ करके मुझको जाना है, मुझे तो जिंदा रहना है। प्रभु सेवा यहाँ सब कुछ है, हर क्षण हर सांस में तेरा डेरा हो, आत्म कल्याण का मार्ग बने, ऐसा मन में बसेरा हो, मुझे तो जिंदा रहना है। नहीं देश-विदेश में जंग रहे, शांति का सदा उल्लास रहे, जीव...
शिव-शक्ति संकल्प
स्तुति

शिव-शक्ति संकल्प

बाल कृष्ण मिश्रा रोहिणी (दिल्ली) ******************** शिवालयों से शंखनाद हुआ, गूंजा यह संदेश, हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। हर थिरकन में सृष्टि की लय, साँसों में ओमकार समाए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। सृष्टि का हर कण है पावन, शक्ति का हर रूप अनमोल, नारी जब सँवारे घर-आँगन, और रण में भरती हुँकार। दुर्गा बन संहारे दानव, काली बन मिटाए अंधकार, उसकी ममता में विष्णु बसें, संहार में बसा महेश का सार। ब्रह्मा-विष्णु-महेश की शक्ति हर थिरकन में सृष्टि की लय हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पुरुष जब ध्यान में लीन हो, जटा में गंग बहे अविरल, डमरू की थाप पर नाचता, काल भी बन जाए शांत और सरल। मिट जाए असुरत्व जगत से, सतयुग सा उजियारा आए। हर नारी में दुर्गा जागे, हर पुरुष शिव रूप बन जाए। पार्वती संग ...
नया साल
कविता

नया साल

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** अमीर-अमीर होते जाएंगे और गरीब और भी ज्यादा गरीब, भरमाया मस्तिष्क कहेगा है ये हमारा नसीब, नहीं बदलेगा किसी का सूरतो हाल, ज्यादा उम्मीद मत पालना अच्छा होगा नया साल, खेल वही जारी रहेगा, चालाक धर्म, जाति पाती और अछूत कहेगा, दुश्वारियों से जान नहीं छूटेगा, लुटेरा खुलकर लूटेगा, भाग्य मानने वालों का भाग फूटेगा, जहरीली हवाओं से दम घुटेगा, होगा वही लड़ाई व मारकाट, होगा हमेशा की तरह बंदरबाट, नेता विभिन्न मुद्दे उछालेंगे, सब लोग उधर ही दिमाग डालेंगे, विपक्ष अपना खेल संभालेंगे, प्रशासन सबका तेल निकालेंगे, हां पैसे वालों के लिए होगी कुछ दिन खुशियां, त्राहिमाम करते रहेंगे जो है दीन दुखिया, मन मस्तिष्क में वहीं सड़ांध होंगे, ऐसे ही लोग सभ्रांत होंगे, बस इस गुजरते जैसा न हो नया साल, जिसका स्वा...
कभी  तो थक जाया करो
कविता

कभी तो थक जाया करो

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** थक गई हो क्या, नहीं यू ही लेट गई हूँ, क्या चाय बना दूँ!! कभी थकती नहीं वो दिनरात जूझते-जूझते ! बच्चों की नींद की निगरानी करती बिना खटपट काम निबटाती ! स्कूल, ऑफिस से आने पर गर्म-गर्म भोजन, नास्ता परोसती क्या कभी थकती नहीं होगी? दिन में सबके आराम के पलों मे कपड़े तहाती, इस्त्री कर सब की अलमारियों में सजाती, अम्माँ क्या चाय मिलेगी कि पुकार पर, चौके में दौड़ जाती, कभी तो थकती होगी !! इतना आसान कहाँ होता है उसको खुद की मन की करना , सारे प्रलोभन छोड़ने पड़ते होंगे! इनको ना कहने की आदत नहीं होती इनके सपनों में भी दूध उबल कर गिरता होगा, इनकी आँखों की पलकें भी घर के दरवाजों पर बिना झपके लगी होती हैं कि शायद कोई मेहमान आता होगा ! सपने में भी इनको चैन नहीं मिलता है! हे नारी त...
इंतजार
कविता

इंतजार

डॉ. राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** इंतजार है ज़ब कोई अपनी खुशी से हमसे बात करें। इंतजार है ज़ब कोई समझें हम इतने बुरे भी नहीं है। इंतजार है ज़ब कोई समझें साथ खड़ा व्यक्ति मानव नहीं महामानव है। इंतजार है ज़ब कोई समझें हम उनको जीवन का हर मुकाम फतेह करते देखना चाहते हैं। इंतजार है ज़ब कोई समझें आध्यात्मिक लोग ऐसे ही किसी के जीवन में नहीं चले आते। इंतजार है ज़ब कोई समझें कि मैं आया हूँ उसके जीवन को एक दिशा देने। परिचय :-  डॉ. राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा...
गणित दिवस
कविता

गणित दिवस

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** गणित दिवस पर जिंदगी भर का गणित लगाया। क्या खोया क्या पाया, इसका हिसाब लगाया। जब पाया में से खोया को घटाया हासिल का शुन्य आया। सोचा कर्म तो इतने करे, फिर भी जीरो क्यों आया। कर्मों में से अपनी जिंदगी की मेहनत का जोड़ लगाया १०० में से ९९ नंबरों को पाया। एक नंबर को ढूंढने में सभी कर्मों का लेखा जोखा पाया। आखिर में यही पाया जीवन एक जिम्मेदारी। जोड़ लगा कर जिंदगी जीरो ही पाओगे। कर्मों का फल ईश्वर के हाथों अंत में ही पाओगे। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरच...
धरती
कविता

धरती

पूजा महाजन पठानकोट (पंजाब) ******************** धरती है हमारे लिए कितना कुछ कर जाती हम सबका है भार उठाती जीवन की राह को है आसान बनती पेड़ों, नदियों, पहाड़ों आदि से हमारा जीवन है महकाती जीवन की नई दिशा है दिखाती धरती की कीमत जानों ए मेरे साथी नहीं तो बन जाओगे तुम धरती के अपराधी स्वच्छता की खाओ तुम कसम धरती को हरा भरा रखने के लिए उठाओ तो सही तुम पहला कदम परिचय :- पूजा महाजन निवासी : पठानकोट (पंजाब) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, ह...
प्रीत की राह
कविता

प्रीत की राह

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** कल तक जिनके साथ चले हर पल हम उनके साथ चले। खयालों मे वो जब भी आएँ संग मे यादों की बारात चले। कल तक… चलना ही है जीवन की रीती पथिक कितने ही आन मिले। पल दो पल का साथ निभाया सब रिश्ते नाते छोड़ कर चले। कल तक… बन्धन है ये प्यार का न्यारा मन का मीत बने जो दुलारा। अन्तर मन मे अंकित वो मूरत तन्हाई मे भी साथ साथ चले। कल तक... प्रीत की राह पर चले हम तो मन मन्दिर मे अब प्यार पले। देते रहेंगे हम उनको दुआएँ जब तक जीवन ज्योति जले। कल तक… परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी. निवासी : उज्जैन (मध्य प्रदेश) रुचि : आपकी बचपन में व्यायाम शाला में व्यायाम, क्षिप्रा नदी में तैराकी और शिक्षा अध्ययन के साथ कविता, गीत, नाटक लेखन मंचन आदि में गहन रूचि रही है...
आँच अहसास की
कविता

आँच अहसास की

छत्र छाजेड़ “फक्कड़” आनंद विहार (दिल्ली) ******************** सुलग रहे मोरे अंग अंग सजना तड़पूं अकेली मनवा चैन न पाये बसंत बयार बहे, मौसम रंगीला तरसे जिया, काहे न पिया आये कूके कोयली, बोले पपीहा विरह-अगन मोरा जिया जराये विरह-अगन से जियरा धधके ननदिया जब शृंगार सजाये फूलवा महके, पाखी चहके देवरानी, जेठानी छेडछाड़ जाये मन ही मन मैं तरसूं घनी जो लहक लहक भाभी रंग उड़ाये देवर होले होले करे इशारे कैसे बचूँ, मोहे समझ न आये आय पिया मोहे उर से लगाओ रातें सर्दी की खाली न जाये चैन मिले जो दीदार करूँ मैं लंबी रतिया मोहे खूब सताये टेर उठे जो माधव मुरलिया की चीर, चीर जाये करजेवा मोरा झंकार उठे पग की पायलिया नयन तन्हा, छलक-छलक जाये सातों सुर हँस सजाये पवनिया इंद्रधनुष रंग नभ में सरसाये इंतज़ार में गौरी पूछे दरवजे से मनवा सरसे,कब पिया आये आँच अहसास ...
आओ मनाएं मकर सक्रांति
कविता

आओ मनाएं मकर सक्रांति

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** पौष जाए माघ आए शीत की छटा बह आये मकर सक्रांति पर खुशियाँ घर घर आये।। घरपरिवार में तिल गुड़ चिड़वा मुड़ी लाये मकरसक्रांति पर्व की खुशियाँ तनमनमे छाए।। मकर सक्रांति पर्व है ऐसा दान धर्म स्नान भाये वस्त्र अन्न बर्तन कम्बल का दानपुण्य बढ़ जाए।। तीर्थों में आनाजाना, मकर सक्रंति पर्व बताये भारतवर्ष के हर कोने में, मकरसक्रांति मनाए।। नदियां कुंड तालाब पोखरे में ठंडे जल से नहाए मकर सक्रांति पर्व की परंपरा की रीत निभाए।। दही चिड़वा घेवर खानपान में आनंद खूब लाये एक संग में शीत की लहर में अलाव को जलाए।। आसमान की रौनक चारो तरफ यह पर्व महकाये रंग बिरंगी लाखों पतंगों को उड़ाने की मस्ती लाये।। मकर सक्रांति माघ महीने का है दान धर्म का पर्व परंपरा को परम्परागत निभाये, सन्देश सब फैलाये।। आओ हम सभी प्रेमपूर्वक मकर सक...
श्रेष्ठ भक्त का जन्म दिवस है
कविता

श्रेष्ठ भक्त का जन्म दिवस है

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** सबने उत्तम अवसर पाया। विगत अनेकों वर्षों से, राधे भैया ने झूम मनाया। श्रेष्ठ भक्त... राधे भैया ने निवास को, सत्संग से है तीर्थ बनाया। प्रेरक बनकर हम अनुजो के, सबको भक्ति मार्ग दिखाया। श्रेष्ठ भक्त ... उनका वरद हस्त है सिर पर, ये आशीष सदा फलता है। वे जो मार्ग बताते हमको, उसपर परमेश्वर से मिलाया। श्रेष्ठ भक्त... हनुमत से प्रार्थना यही है, उनको पूर्ण स्वस्थ वो करदे। सत्संग बिन व्याकुल आत्मा को, दे सत्संग तृप्त वो करदे। हनुमत सदा दास की सुनकर, तुमने उसका मान बढ़ाया। श्रेष्ठ भक्त का... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है...
सदाशिव शंकर महेश्वर महेश
स्तुति

सदाशिव शंकर महेश्वर महेश

बाल कृष्ण मिश्रा रोहिणी (दिल्ली) ******************** परमेश्वर त्रिलोचन त्रयंबक त्रिनेत्र। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, भव-भय हरन भोलेनाथ, जय- जय शिव शंकराय॥ प्रचंड-तांडव-नृत्य-रत, दिगंबर-विश्वरूपम्, शून्य-हृदय-निवासी, पूर्ण-ब्रह्म-अनुपमम्। अनादि-अनंत-कालचक्र- अधिपति, महादेव-महंतम्, क्षण-भंगुर-लीलाधारी, विभु-अविनाशी-अनंतम्॥ जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्- निलिम्प-निर्झरी, शीश-शशांक-धवल-दीप्ति, अमृत-रस-झरी। व्याल-कराल-माल-कंठ, भस्म-विलेपन-धारी, वैराग्य-पुंज-महायोगी, त्रिपुर-अरि-विनाशकारी॥ त्रिशूल-धारिणी-शक्ति, न्याय-वज्र-प्रहारम्, डमरू-नाद-गुंजित-ब्रह्मांड, सृजन-स्वर-सारम्। महानाश-कुक्षि-स्थित, नूतन-सृष्टि-विधानम्, रुद्र-भीषण-संहार, शिव-सौम्य-निर्माणम्॥ काल-काल-महाकाल, काल-जयी-अनामी, चराचर-जगत-रक्षक, विश्वेश्वर-स्वामी। करुणा-पारावार-शंभू, तारन-तरन-हारी...