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पद्य

कश्मीर
कविता

कश्मीर

डॉ. किरन अवस्थी मिनियापोलिसम (अमेरिका) ******************** कश्मीर ऋषि कश्यप की भूमि, अदिति माँ से सिंचित नगरी भारत के मस्तक की बिंदी, कश्मीर है भारत का प्रहरी ऋषि च्यवन की तपोभूमि, तनमन-रोग किया उपचार सुश्रुत संहिता की जड़ी बूटी है, मानवता को अनुपम उपहार। कश्मीर है कवि कल्हण की भूमि, जिस पर अभिमान रहा हमको 'राजतरंगिणी' की रचना कर, कश्मीरी इतिहास दिया सबको। 'पंचतंत्र 'की जन्मभूमि यह, विष्णुशर्मा के ज्ञान की नगरी धरती पर्वत और पठारों की, भारत के सम्मान की नगरी। सोमदेव की 'कथासरित्' की, देववाणी के अतुल ज्ञान की रामायण काल की 'खीर भवानी', भृगु ऋषि की' अमरेश्वर 'नगरी यह भारत की प्राचीन है नगरी, कश्मीर है भारत की देहरी इतिहास रचा इसने भारत का, कश्मीर है भारत का प्रहरी।। परिचय :- डॉ. किरन अवस्थी सम्प्रति : सेवा निवृत्त लेक्चरर निवासी : सिलिकॉन सिटी इंदौर (म...
गुरुदेव
कविता, भजन

गुरुदेव

अशोक कुमार यादव मुंगेली (छत्तीसगढ़) ******************** जय हो! महाज्ञानी गुरुदेव ज्ञानदाता। सच्चा पथ प्रदर्शक भगवान विधाता।। सूर्य के समान चमक रहा है विद्याधर। साक्षात अंतरात्मा को प्रकाशित कर।। अबोध बालक में जागृत किया बोध। विशेषज्ञ बन किए वृहद नवीन शोध।। ज्ञानी गुरु जड़ बुद्धि में ला देता चेतन। प्रेरणा से लक्ष्य का करवाता है भेदन।। मन में जगा देता है सीखने की इच्छा। मूल्य निर्धारण के लिए लेता परीक्षा।। नैतिकता और संज्ञान में बनाता प्रवीण। खेल, नृत्य, गीत, संगीत में करता उत्तीर्ण।। अंधकार का बनाया उज्जवल भविष्य। सत्य की पहचान कर दिखाया दृश्य।। कोविद ही लाता है जन-जन में सुधार। समाज कल्याण करता प्रभु के अवतार।। वंदना करो गुरु का चरण कमल पकड़। मांग लो तुम आशीष विवेक का जड़।। सहज मानव को योद्धा बना जीतवाता। जीवन जीने की आदर्श कला सिखाता।। परिचय : अशोक कुमार ...
कुरुक्षेत्र
कविता

कुरुक्षेत्र

सीमा रंगा "इन्द्रा" जींद (हरियाणा) ******************** धर्म युद्ध का शंखनाद बज उठा काल चक्कर चला ऐसा यहां पर ऐसा धर्म चक्र चलाया श्री कृष्ण ने पांच पड़े सौ पर भारी यहां पर ज्योतिसर में दिया गीता उपदेश धर्म की खातिर छिड़ा ऐसा युद्ध यहां पर ब्रह्मसरोवर, शक्तिपीठ, थानेश्वर मंदिर तीर्थ, सरोवरों से भरी धरा यहां पर सांस्कृतिक विरासत समेटे हुए मारकंडा, सरस्वती की बहती धारा यहां पर उगाता गेहूं, बासमती चावल प्रदेश ये मिटती जनमानस की भूख यहां पर रौनक रहती साधु-संतों की हमेशा देश-विदेश से आते पर्यटक यहां पर लाल मिट्टी की बात अनोखी बताती भू शौर्य की गाथा यहां पर गिना जाता पावन नगरी में इसे अभिषेक करने आते सभी यहां पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की बात अनूठी विद्यार्थियों के ज्ञान का भंडार यहां पर परिचय :-  सीमा रंगा "इन्द्रा" निवासी :  जींद (हरियाणा) ...
बुजुर्गो की दशा
मुक्तक

बुजुर्गो की दशा

रामसाय श्रीवास "राम" किरारी बाराद्वार (छत्तीसगढ़) ******************** मुक्तक बुजुर्गो की दशा देखो, हुई कैसी लाचारी है। जीवन के इस अवस्था में, परेशानी भी भारी है ।। बड़े मजबूर रहते हैं, ये कितने कष्ट सहते हैं। स्वंय का बोझ ढोते हैं, मगर हिम्मत न हारी है।। सताता है अकेला पन, मगर रहते अकेले हैं। जीवन में जो भी गम आया, सभी हंस कर ये झेले हैं।। बड़े खुद्दार होते हैं, भले छिपकर ये रोते हैं। नहीं कोई काम है आता, यही दुनिया के मेले हैं।। खपाई उम्र ये पूरी, सदा जिन पर हैं ये अपने। सदा करते रहे पूरे, उन्ही लोगों के ये सपने।। नहीं अब पास वो इनके, रहम पर जो रहे इनके। चलन कैसा है अब आया, पराए हो गए अपने।। परिचय :- रामसाय श्रीवास "राम" निवासी : किरारी बाराद्वार, त.- सक्ती, जिला- जांजगीर चाम्पा (छत्तीसगढ़) रूचि : गीत, कविता इत्यादि लेखन घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित क...
पितृ आरती
गीत, भजन, स्तुति

पितृ आरती

राम स्वरूप राव "गम्भीर" सिरोंज- विदिशा (मध्य प्रदेश) ******************** आरती पूज्य पूर्वज की, हमारे कुल के अग्रज की श्राद्ध तिथि आज है जिनकी, दिवंगत कुल के अग्रज की क्वार पक्ष कृष्ण मनभावन, स्मृति अपनों हो पावन नयन जो दे गए सावन, यजन उनके चरण रज की आरती पूज्य पूर्वज की.... डाव, कुशघांस से अर्पण, दुग्ध तिल जौं का कर मिश्रण हो तर्पण मंत्र का पाठन, दोश हर मंगल कारज की आरती पूज्य पूर्वज की... श्राद्ध का शुभ दिवस आया, दिवंगत प्रिय की सुधि लाया दान उनके निमित्त भाया, आरती पूज्य की... श्राद्ध की षोडश तिथि न्यारी, ग्याजी हैं सरित सारी पितामह, तात, ताऊ, मातु, ताई, भाई-भावज की आरती पूज्य पूर्वज की, हमारे कुल के अग्रज की पितृ देवाय च विद्महे, कुल अग्रजाय च धीमहि, तन्नो पूर्वज प्रचोदयात परिचय :- राम स्वरूप राव "गम्भीर" (तबला शिक्षक) निवासी : सिरोंज जि...
बसेरा होगा
कविता

बसेरा होगा

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** चहकने दो मुझे आंगन में झूलती बेलो के साथ। दौड़ने दो मुझे देहरी के उस पार बहने दो मुझे निर्बाध गति से कल-कल मत बांधो हमें चहकनदो, दौड़ने दो हमें। फूलों से आंगन सजेंगे कल-कल करता जल धरा को सींचेगा हरित करेगा श्यामला धरा को हरियाली नाचेगी टेसू फूलेंगे रवि वर्ण में बिखरेंगे बसंत बहार में फूलों से आंगन सजेंगे। काटो मत वृक्षों को कहीं पंछी ठौर होगा किल-किल का कलरव होगा चुग्गा चुगने मुंह खोलता होगा चहक-चहक चिड़िया गाती होगी कोयल कूक सुनाती होगी काटो मत उसे वह किसी का बसेरा होगा। परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर...
हिंदवासी तुम हिंदी बोलो
कविता

हिंदवासी तुम हिंदी बोलो

विवेक नीमा देवास (मध्य प्रदेश) ******************** ज्ञान की भाषा हिंदी है विज्ञान की भाषा हिंदी है जन मन के संप्रेषण के कौशल की भाषा हिंदी है। मीरा की भाषा हिंदी है कबीरा की भाषा हिंदी है गीत संगीत और महाकाव्य को गढ़ती भाषा हिंदी है। पूरब की भाषा हिंदी है पश्चिम की भाषा हिंदी है उत्तर से दक्षिण तक के विस्तार की भाषा हिंदी है। शासन की भाषा हिंदी है शिक्षण की भाषा हिंदी है रविंद्रनाथ के जन-गण में गूंज रही भाषा हिंदी है। दर्शन की भाषा हिंदी है प्रदर्शन की भाषा हिंदी है मन में भावों के कोपल के अंकुरण की भाषा हिंदी है मेरी भाषा हिंदी है तेरी भाषा भी हिंदी है भारत के जनजीवन की गौरव गाथा भी हिंदी है फिर क्यों हमने भुलाई हिंदी है पर भाषा की लगाई बिंदी है भूल गए हम सब पल में रिश्तों की भाषा हिंदी है। भाषा की रानी हिंदी है फिर भी बेगानी हिंदी है अपने...
यही तो है हिन्दी
कविता

यही तो है हिन्दी

प्रमेशदीप मानिकपुरी भोथीडीह, धमतरी (छतीसगढ़) ******************** हिंदुस्तान की पहचान जो जन गण का अभिमान जो भावो की है जो आरती यही तो है हिन्दी ग्रंथो का आधार जो सुरसरी की धार जो भारत माता की बिन्दी यही तो है हिन्दी गीत, गजल और कविता पर्वत, सागर और सरिता समृद्धि की पहचान जो यही तो है हिन्दी भारतीयो की अस्मिता भाव से सदा सुपुनीता आवाम की आवाज जो यही तो है हिन्दी आन, बान, शान है सबका स्वाभिमान है संस्कृति की करे आरती यही तो है हिन्दी मन के सभी भावो मे कंही चंचल कंही ठहराव मे समृद्ध जो है समुद्र सा यही तो है हिन्दी व्याकरण से प्रबुद्ध जो सात्विक और शुद्ध जो सुवासित है जो अलंकार से यही तो है हिन्दी भिन्न-भिन्न राग रंग मे जीवन के प्रत्येक रंग मे संस्कार की झलक जिसमे यही तो है हिन्दी भारत की मातृभाषा बने देश एकता के रंग मे सने बने देश का अब शान...
अधरों की अमर वाणी है हिन्दी
कविता

अधरों की अमर वाणी है हिन्दी

उषाकिरण निर्मलकर करेली, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** मेरे नन्हें अधरों की किलकारी है हिन्दी। हर तोतली आवाज में, बड़ी प्यारी है हिन्दी। जवां हुई जो मेरे संग-संग हाँ, मेरा हमसफर, मेरा हमराही है हिन्दी। मेरी आन, मेरा गुरुर, मेरा अभिमान है हिन्दी। मेरा नाम, मेरा काम, मेरी पहचान है हिन्दी। ये मेरा व्यक्तित्व है, अस्तित्व है मेरा, और मेरे लिए तो मेरा हिंदुस्तान है हिन्दी। सबको अपनें आँचल में समेटे हुए, संस्कृत से जन्मी, मॉं का अवतार है हिन्दी। अनुपम, अलंकृत, अनमोल, अनुशासित, और पूर्ण परिभाषित संस्कार है हिन्दी। मानों चिरकाल से चिरपरिचित, चिरस्मरणीय, चिरयौवना और चिरस्थायी है हिन्दी। हर रूप में है अति सुशोभित, कभी दोहा, कभी छंद, कभी चौपाई है हिन्दी। सुरभित सुमन की भाँति महकती, साहित्य की शुभाषितानी है हिन्दी। शब्दों का जो अथाह सागर है, अधरों की अमर वाणी ...
पित्तर
आंचलिक बोली, कविता

पित्तर

परमानंद सिवना "परमा" बलौद (छत्तीसगढ) ******************** जियत ले दाई ददा ला पानी बर तरसाये, मरे मा पित्तर मनावत हस, बरा सुहारी खुरमी बनाके, काउआ ला तै खिलावत हस ! वा रे जमाना ते काउआ ला ददा बनावत हस ! जनमदिस परवरिश करिस तेला ते बुल जावत हस, जइसे करबे वइसे पाबे यही कहानी बनावत हस ! वा रे जमाना ते काउआ ला ददा बनावत हस ! जियत ले ते रोज लडे, काली अइस ते बाई के चक्कर मा आये, दाई ददा के खाना पीना ला बंद कराय पापी में तुहु अब गिन्ती आये ! जियत ले खाये बर तरसाय मरे मा गांव गांव ला नेवता देवत हस, वोकरे धन संपत्ति ला रख के होशियारी देखावत हस.! वा रे जमाना ते काउआ ला ददा बनावत हस.! परिचय :- परमानंद सिवना "परमा" निवासी : मडियाकट्टा डौन्डी लोहारा जिला- बालोद (छत्तीसगढ़) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्...
हरि अनंत हरि कथा अनंता
कविता, भजन, स्तुति

हरि अनंत हरि कथा अनंता

अंजनी कुमार चतुर्वेदी निवाड़ी (मध्य प्रदेश) ******************** हरि अनंत हरि कथा अनंता, रामायण है गाती। श्री हरि की महिमा का वर्णन, रामचरित बतलाती। हे अनंत हे कृपासिंधु प्रभु, सब जन शरण तुम्हारी। भव बंधन को दूर करो तुम, रखना लाज हमारी। भाद्र मास की चतुर्दशी को, शुक्ल पक्ष जब आता। सारा जनमानस नत होकर, तुमको शीश झुकाता। चतुर्दशी तिथि है अति पावन, है अनंत का पूजन। चौदह गाँठ लगा धागे में, बाँह बाँधता जन-जन। कथा सुनाते नारायण की, अनंत चतुर्दशी प्यारी। वेद पुराण सभी गाते हैं, श्री हरि महिमा न्यारी। जो ध्याता अनंत फल पाता, भवसागर तर जाता। जो हो जाता लीन आप में, दुख कलेश हर जाता। रहते शेषनाग सैया पर, जग के पालन करता। चरण शरण प्रभु रहूँ आपकी, सब सुख मंगल करता। शुभ आशीष आपका पानें, पूजन सब करते हैं। हैं अनंत, प्रभु सबकी झोली, खुशियों से भरते हैं। ...
हिन्दी हमारा अभिमान है
कविता

हिन्दी हमारा अभिमान है

महेन्द्र साहू "खलारीवाला" गुण्डरदेही बालोद (छत्तीसगढ़) ******************** हिन्दी में ही व्याकरण है हिन्दी से ही आचरण है। हिन्दी से ही सरल,सहज हर समस्या का निराकरण है।। हिन्दी भाषा हमारी शान है हिन्दी से ही हमारा सम्मान है। छंद,रस,अलंकार से सुसज्जित हिन्दी हमारा अभिमान है।। हिन्दी हमारी मातृभाषा है हिन्दी जीवन की आशा है। परचम लहराए हिन्दी का हम सबकी यही पिपासा है।। हिन्दी हम सबके लिए खास है इनसे बढ़ता आत्मविश्वास है। हिन्दी से सात सुरों का सरगम सुरीली नगमों का साजोसाज है।। बड़ी प्यारी भाषा है हिन्दी सबके मन भाती है हिन्दी। लगती सुरीली भाषा हिन्दी जैसे सजे माथे की बिन्दी।। परिचय :-  महेन्द्र साहू "खलारीवाला" निवासी -  गुण्डरदेही बालोद (छत्तीसगढ़) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।...
संसार हमारा है हिंदी
ग़ज़ल

संसार हमारा है हिंदी

नवीन माथुर पंचोली अमझेरा धार म.प्र. ******************** व्यवहार हमारा है हिंदी। आचार हमारा है हिंदी । लिखने, पढ़ने की बातों का, आधार हमारा है हिंदी। बदले बोली, पग-पग दूरी, विस्तार हमारा है हिंदी। पद, गीत, कविता, छंदों में, सब सार हमारा है हिंदी। रिश्ते अपने, सच्चे इससे, संसार हमारा है हिंदी । जन-जन के सच्चे भावों में, सब प्यार हमारा है हिंदी। इस दौरे जहाँ की शिक्षा में, हथियार हमारा है हिंदी। अपनायी भाषाएँ सबकी, इक हार हमारा है हिंदी। परिचय :- नवीन माथुर पंचोली निवास - अमझेरा धार म.प्र. सम्प्रति - शिक्षक प्रकाशन - देश की विभिन्न पत्रिकाओं में गजलों का नियमित प्रकाशन, तीन ग़ज़ल सन्ग्रह प्रकाशित। सम्मान - साहित्य गुंजन, शब्द प्रवाह, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिन्दी रक्षक २०२० राष्ट्रीय सम्मान घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जात...
भारत के मस्तक की बिंदी है हिंदी
कविता

भारत के मस्तक की बिंदी है हिंदी

प्रभात कुमार "प्रभात" हापुड़ (उत्तर प्रदेश) ******************** भारत मांँ के मस्तक की बिंदी है हिंदी। भारत मां का अलंकार है हिंदी, भारत मांँ का शीश सुशोभित करती है हिंदी, देव-भाषा की अनमोल कृति है हिंदी, भारत मांँ के मस्तक की बिंदी है हिंदी। जन -गण-मन की शक्ति है हिंदी, भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति है हिंदी, नन्हे मुन्नो की बोली है हिंदी विद्वानों की विद्वता को परिभाषित करती है हिंदी जब-जब इस पर संकट की परछाईं भी दिखती, कलमकारों की कलम से निकली हर हुंकार हिंदी रक्षण में आंदोलन करती, भारत मांँ के मस्तक की बिंदी है हिंदी। भाषाओं में सर्वोपरि राष्ट्रभाषा है हिंदी जन-गण-मन में रची बसी है हिंदी हर भारतवासी को एक सूत्र में बांधती है हिंदी, भारत मांँ के मस्तक की बिंदी है हिंदी। परिचय :-  प्रभात कुमार "प्रभात" निवासी : हापुड़, (उत्तर प्रदेश) भारत शिक्षा :...
हिन्दी भारत की शान
कविता

हिन्दी भारत की शान

अनुराधा प्रियदर्शिनी प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) ******************** हिंदी की बोली में मिठास है सबको अपनी सी लगती है सात सुरों में झंकृत होती हिन्दी सबके मन को भाती हिन्दी अंग्रेजी शिक्षा बनी है जरूरत ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बड़ी नयी पीढ़ी के बच्चों को बताना हिन्दी से उनका रिश्ता है गहरा हिन्दी हमारे भारत की शान है भारतीयों का अभिमान हिन्दी सहज सरल हमारी भाषा हिन्दी देवनागरी लिपि में लिखी जाती वैज्ञानिकता से परिपूर्ण है हिन्दी हर देश की अपनी एक भाषा है हमारे भारत की पहचान हिन्दी हिन्दुस्तान के माथे की है बिंदी चौदह सितंबर के इस शुभ अवसर एक संकल्प हम सबको करना है हिन्दी का खूब प्रचार प्रसार करना हिन्दी को विश्व जगत में फैलाना है हमारी मातृभाषा है प्यारी हिन्दी जन-जन की भाषा हमारी हिन्दी अब तक है राज भाषा हमारी हिन्दी राष्ट्र भाषा पद पर इसको बिठाना है ...
विश्व शान्ति की प्रतीक हिंदी
कविता

विश्व शान्ति की प्रतीक हिंदी

रामेश्वर दास भांन करनाल (हरियाणा) ******************** हिंदी है हम सब की भाषा, मिलकर इसका सम्मान करो, हिंदी में संवाद कर, हिंदी का गुणगान करो, प्यार प्रेम दर्शाने वाली, करूणा की मुर्त है, एक दूसरे से जोड़ती, ऐसी इसकी सूरत है, हिंदी को दो प्राथमिकता, ताकि विचार विचार बढ़े आगे, देश के सम्मान में, हिंदी का गुणगान बढ़े आगे, अज्ञानता से निकालकर, ज्ञानी हमें बनाती है, दुनियां में जीने के, सारे ढंग दिखाती है, हिंदी जोड़ती है आपस में, समुचे भारत वर्ष देश को, हिंदी देती है सभी जनों में, भाईचारे के संदेश को, गौरव गाथा है अपार इसकी, वैभव गौरवशाली है, विश्व शान्ति की प्रतीक, भाषा यह निराली है, ऋषि मुनियों की धरती पर, हिंदी का स्थान करो ऊंँचा, पताका इसकी फहरे विश्व में, ऐसा सम्मान करो ऊंँचा, परिचय :-  रामेश्वर दास भांन निवासी : करनाल (हरियाणा) घोषणा ...
हिंदी भाषा
कविता

हिंदी भाषा

डॉ. अर्चना मिश्रा दिल्ली ******************** हिंद देश के वासी हम चलो इसका मान बढ़ाएं हिंदी को सब लोग मिलकर क्यों ना जन-जन तक पहुंचाएं हो सर्व सुलभ हिंदी ऐसी साहित्य का ज्ञान बढ़ाएँ सब को हिंदी से प्रेम हो कुछ ऐसा करके दिखाएं दिन प्रतिदिन कुछ ना कुछ लोगों को जगाएँ हिंद के प्रति समर्पित कुछ कविताएँ, गीत, नाटक, सबको पढ़ाएँ। राष्ट्रकवि से लेकर सब कवियों की गाथा सुनाएँ । क्या रहा इतिहास इसका चलो सबको बताएँ॥ हो जयशंकर प्रसाद या प्रेमचंद, मीरा हो या रसखान हो हो कबीर चाहे, सूरदास जायसी हों या मैथिलीशरण गुप्त हो राष्ट्रवाद की भावना सबमें प्रबल रही सभी को प्रेम हिंदुस्तान से सभी की आन बान जुड़ी हिंदी से ही थी फिर से अब स्वर बुलंद होगा हिंदी का परचम घर-घर लहरेगा पढों-पढों पढ़ना ज़रूरी हैं लिखों-लिखों लिखना भी सबसे ज़्यादा ज़रूरी हैं ॥ यही नारे गूंजेंगे दिन रात ह...
हिन्दी हमारी
कविता

हिन्दी हमारी

डॉ. कोशी सिन्हा अलीगंज (लखनऊ) ******************** हिन्दी तन है, हिन्दी मन है, हिन्दी है अभिलाषा हिन्दी ही तो है हम सबके मन से निकली भाषा शब्दों का अखंड संसार भरा हुआ है इसके अन्दर भावों को व्यक्त करने का आसार है इसके अन्दर फैशनेबुल अँग्रेजियत में तो है इक परायापन सीधी सरल हिन्दीपन में तो है सरल अपनापन सक्षम है उठाने को ज्ञान व विज्ञान का अतुल भंडार संभाले है विकट व्याकरण का विषम व्यापार हिन्दुस्तान‌ की पावन भूमि से है यह निकली मन प्राण में रमती सरकती हुई है यह चली बहती गंगा की की तरह निर्मल है हमारी हिन्दी स्वदेश के भाल पर यह सुशोभित है ज्यों बिन्दी नमन करें, शमन करें हम हिन्दी के पुरोधाओं की गायें, लिखें, पढें व डाले एक हवि हम समिधाओं की। परिचय :- डॉ. कोशी सिन्हा पूरा नाम : डॉ. कौशलेश कुमारी सिन्हा निवासी : अलीगंज लखनऊ शिक्षा : एम.ए.,पी एच डी, बी.एड....
दिल हूं हिंदुस्तान की
कविता

दिल हूं हिंदुस्तान की

डॉ. निरुपमा नागर इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************** सरल, सहज, सुमधुर वचन संस्कृत से पाया अपना जीवन सबके मन को भाती सकल जगत को मोह रही है अंक मेरे अपार शब्द राशि सहेज रही बोलियों को बन मातृशक्ति नवीन तकनीक के लगा कर पंख मैं तो उड़ चली हिंदी कहते मुझको दिल हूं हिंदुस्तान की राजभाषा बन हिंद की राष्ट्र भाषा बनने की अब तमन्ना मैं कर रही परिचय :- डॉ. निरुपमा नागर निवास : इंदौर (मध्यप्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com ...
हिन्दी हिंदुस्तानी भाषा
गीत

हिन्दी हिंदुस्तानी भाषा

रामसाय श्रीवास "राम" किरारी बाराद्वार (छत्तीसगढ़) ******************** मात्रा भार- १६-१४ हिन्दी हिंदुस्तानी भाषा, इस पर हम अभिमान करें। नतमस्तक इसके चरणों में, इसका हम सम्मान करें।। केवल अक्षर इसे न समझें, यह माथे की बिंदी है। दुनिया में यह सबको प्यारी, लगती अपनी हिंदी है।। मुक्त कंठ से आओ मिलकर, हम इसका गुणगान करें हिन्दी हिंदुस्तानी भाषा, इस पर हम अभिमान करें रग-रग में बहती है जैसे, रक्त बूॅंद की धारा है। प्राण वायु बन पोषित करती, जीवन यही हमारा है।। सुधा पिलाती है यह हमको, इसका हम रस पान करें हिन्दी हिंदुस्तानी भाषा, इस पर हम अभिमान करें इस हिन्दी के हर अक्षर में, मिलता है विज्ञान भरा। सदा दमकती है कुंदन सा, कर लो यह पहचान जरा।। सूर्य ज्योति सी सदा चमकती, इसका हम अनुमान करें हिन्दी हिंदुस्तानी भाषा, इस पर हम अभिमान करें हिन्दी के बिन हिंदुस्ताॅ...
हंसिका
कविता

हंसिका

माधवी तारे लंदन ******************** हिंदी रूठ गई, अपनी मां से बिखरित करके केश कहे मुझे दो, बिंदी लाके तभी मैं सवांरूं केश परिचय :- माधवी तारे वर्तमान निवास : लंदन मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 आपको यह रचना अच्छी लगे तो साझा अवश्य कीजिये और पढते रहे hindirakshak.com...
चौपट भविष्य
कविता

चौपट भविष्य

रामेश्वर दास भांन करनाल (हरियाणा) ******************** बंद हो रहे हैं स्कूल, अब मेरे गांँव में, बच्चे कहां जाएं पढ़ने, अब मेरे गांँव में, उजड़ जायेगा ये जीवन, बिन पढ़ाई के, कौन बच्चों को पढ़ाएगा, अब मेरे गांव में, सदियों से था बना, मेरा पिता भी इसमें पढ़ा, अब मैं कहां जाऊं पढ़ने, किस गांँव में, पिता का साया नहीं है सर पर मेरे, माँ है अकेली, कौन छोड़ने जाएं मुझे स्कूल, किस गांँव में, साथी मेरे सब चिंता में हैं डूबे हुए जब से, मुरझा गए हैं चेहेरे सब बच्चों के मेरे गांँव में, बेटियों पर भी रहम नहीं खाया है जालिम आकाओं ने, बचपन को अनपढ़ बनाने की शाजिश रची है मेरे गांँव में, थी बुनियाद पढ़ाई की ये बढ़ी, गहराई से थी जड़ी, तोड़ दी है अब पढ़ाई की, बुनियाद मेरे गांँव में, कर दिया है चौपट भविष्य हमारा, रहनुमाओं ने, बंद कर हैं रहे स्कूल, अब मेरे गांँव में, कैसे पढ...
साक्षरता की मशाल
कविता

साक्षरता की मशाल

देवप्रसाद पात्रे मुंगेली (छत्तीसगढ़) ******************** साक्षरता की मशाल जलाकर नौजवानों आओ। अज्ञानता के अंधकार को मिलके सभी भगाओ। गरीब अनपढ़ बिना ज्ञान के, लूट रहे हैं साहूकार। पीढ़ी-पीढ़ी बहते जा रहे हैं अनपढ़ता के धार।। मिलके सभी आओ साथियों ज्ञानदीप जलाओ। अज्ञानता के अंधकार को मिलके सभी भगाओ। हक है उन्हें भी शिक्षा पाने का जो खेतों में हल चलाते। झोपड़ी मिट्टी के घरों में रहकर तेरे लिए महल बनाते।। मिलके सभी आओ जवानों अपना फर्ज निभाओ। अज्ञानता के अंधकार को मिलके सभी भगाओ।। कोई न हो लाचार दे दो जीवन को शिक्षा का आधार। खुशियों से उनकी दामन भरकर दे दो नया संसार।। बनके तुम शिक्षादाता हर हाथ में कलम थमाओ। अज्ञानता के अंधकार को मिलके सभी भगाओ।। परिचय :  देवप्रसाद पात्रे निवासी : मुंगेली, (छत्तीसगढ़) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना,...
अगर हमारे शिक्षक ना होते..?
कविता

अगर हमारे शिक्षक ना होते..?

धर्मेन्द्र कुमार श्रवण साहू बालोद (छत्तीसगढ़) ******************** अगर हमारे शिक्षक ना होते तो कहाॅं संस्कार का बीज बोते..? कौन सिखाता भाषा वाणी ..? कौन बताता कथा कहानी ..? कौन बनाता अक्षर ज्ञानी..? कौन बतलाता गिनती गानी..? अगर शिक्षक शिक्षा ना देते तो कहाॅं संस्कार का बीज बोते..? अगर हमारे शिक्षक ना होते तो कहाॅं संस्कार का बीज बोते..? कौन सीख देता आचार-विचार..? कौन बतलाता वो शिष्टाचार ..? कौन सिखाता मधुर व्यवहार..? कौन अपनाता मर्यादा संस्कार..? अगर शिक्षक मैला ना धोते तो कहाॅं संस्कार का बीज बोते..? अगर हमारे शिक्षक ना होते तो कहाॅं संस्कार का बीज बोते..? कौन बताता जीवन का आधार..? कौन बताता भूखंड का विस्तार..? कौन बताता इतिहास का सार..? कौन गढ़ता विश्व का परिवार..? अगर शिक्षक कर्मठ ना होते कहाॅं संस्कार का बीज बोते..? अगर हमारे शिक्षक ना...
हिंदी से हम हिदुस्तानी
कविता

हिंदी से हम हिदुस्तानी

सरला मेहता इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** इस मुई अंग्रेजी ने तो किया मातृ-देशभाषा का कबाड़ा बेनियम अपवादों में उलझाया सच हमें कहीं का ना छोड़ा अंकल आंटी का बड़ा झमेला वी व डब्ल्यू का गड़बड़झाला दादा-नाना, चाचा-मामा, भुआ सबको दिया प्रथक से सम्मान बी यू टी बट, पी यू टी पुट से सच बेहतर हमारे किंतु परंतु सी व के से क, सी एच से क भ्रमित बेचारे नन्हें नौनिहाल शी, ही हेज़, वी व दे हेव ठीक पर आय व यू हेव की गुत्थी? हिंदी में तेरे मेरे हमारे तुम्हारे सबके पास-सीधा सा सवाल निमोनिया शुरू होता है पी से सी एच से च और एच से है ह हिंदी में व्यंजनों से जोड़ो स्वर और बनालो शब्दों से वाक्य संज्ञा से लेकर सम्बोधन तक कारक संधि अलंकार समास गद्य पद्य की ये सकल विधाएं पूर्ण करते साहित्य का भंडार स्वीकारें लेखन वाचन में हिंदी हो शुद्ध वर्तनी और उच्चारण प्रचार प्...