आगे दिन किसानी के
अशोक पटेल "आशु"
धमतरी (छत्तीसगढ़)
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काँटा खूंटी ल बिन ले सँगी
मेड़ पार ल चतवार ले।
आगे हे दिन किसानी के
सँकेल के आगी बार दे।
चारो कोती खातु कुड़हा
टेपरी डोली भर म पाल दे।
बाढ़े सब कांदी-कचरा ल
खन-खन के ओला टार दे।
परछी उतरे हे मेड़ पार म
तीरे-तार ल ढेलवानी दे-दे।
खेत के भोरका डबरा ल
खन के रापा-रापा पाट दे।
मेड़ बनगे हे रोठ-रोठ मुही
ओ मेड़ जम्मो ल सुधार दे।
मेड़ जम्मो म माटी भर के
सुग्घर मेड़-पर ला सवाँर दे।
बिजहा तिल राहेर हिरवा ल
मेड़-पार सब्बो कती छिंच दे।
खेत के सुग्घर जोताई करके
धान बिजहा ल बोवाई कर दे।
परिचय :- अशोक पटेल "आशु"
निवासी : मेघा-धमतरी (छत्तीसगढ़)
सम्प्रति : हिंदी- व्याख्याता
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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