पिता
डॉ. भगवान सहाय मीना
जयपुर, (राजस्थान)
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धरती पर जीवन संबल और शक्ति है पिता।
बच्चों के लिए पूंजी और पहचान है पिता।
स्नेह, प्यार और आशीर्वाद से छलकता,
रिश्तों के सागर में गहरा पानी है पिता।
रोटी, कपड़ा और मकान है,
बच्चों की किस्मत और शौहरत है पिता।
एक परिवार का अनुशासन,
घर की छत और बच्चों का अभिमान है पिता।
बिना पिता के संतान होती अनाथ,
घर परिवार की सुरक्षा और संस्कार है पिता।
फूलों के बाग़, बच्चों के खिलौने,
घर के भगवान, पालन और पोषण है पिता।
सारे रिश्ते नाते उनके दम से,
बच्चों की मां की बिंदी और सिंदूर है पिता।
महकते चमन के पहरेदार तो,
परिवार की धरती और आसमान है पिता।
परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार)
निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मे...























