गरीब
बिपिन कुमार चौधरी
कटिहार, (बिहार)
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साहब, बेशक गरीब हूं,
ऐसा वैसा थोड़ी हूं,
सबको पसंद आ जाऊं,
पैसा थोड़ी हूं,
लालच में
इंसानियत भुला दूं,
इतना लाचार थोड़ी हूं,
मेरे दोस्त जरूरत में
करना कभी याद,
दिल का अमीर हूं...
लाख सितम सहता हूं,
क्योंकि गरीब हूं,
दाने दाने को
रहता हूं मोहताज,
ऐसा बदनसीब हूं,
ईमानदारी की रोटी
ही रास आता है,
आदमी अजीब हूं,
मेहनत से दो रोटी
पाकर संतुष्ट रहता हूं,
ऐसा खुशनसीब हूं...
परिचय :- बिपिन बिपिन कुमार चौधरी (शिक्षक)
निवासी : कटिहार, बिहार
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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