काढ़े की महिमा
संजय डागा
हातोद- इंदौर (मध्य प्रदेश)
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जब से कोरोना ने
आकर करी
भारत मे घुसपैठ
हमारी प्यारी
हिन्दी भाषा मे भी
अग्रेंजी शब्दों की
होने लगी घुसपैठ,
माॅस्क और सेनेटाइजर
हिन्दी शब्दकोष मे
पहले-पहल आ गऐ
पिछे क्वारेन्टाइन,
होम आइसोलेशन
प्लाज्मा और एंटी-बाॅडी
भी हिन्दी के जरूरी
शब्द हो गऐ
फिर आया रेमडेसिविर
और आई वैक्सीन की बारी
पर हमारा काढ़ा आज भी
इन सब पर पड़ता है भारी,
भले ही हम इसे पीने मे
आज भी नाक-भौ सिकोड़ते है
पर काढ़े को हम सब
आज भी हिन्दी मे
काढ़ा ही तो बोलते है।।
परिचय :- संजय डागा
निवासी : हातोद जिला इंदौर (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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