नशा
मुस्कान कुमारी
गोपालगंज (बिहार)
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नशा तुम करते हो
भुगतना परिवार को पड़ता है
गलती तुम्हारी होती है
पर भूखे सोना
तुम्हारे बच्चो को पड़ता है
कह-कह कर थक जाती है
तुम्हारी पत्नी
पर तुम तो उन्हे मारने पड़ते हो।
ये आदत बुरी है
तुम भी जानते हो
पर दोस्तो के साथ मे
तुम भी बड़े मजे से पीते हो
जीवन में तुम्हे क्या करना है
तुम नहीं सोचते हो
बच्चे पत्नी को छोड़ कर
तुम दोस्तो की बाते मानते हो।
तुम्हारे बाद क्या होगा घर का
तुम तो शौक से पीते हो
और जनाब हर रोज पीकर
तुम खुद को ही बर्बाद करते हो
उसे खाने या पीने से पहले
पढ़ तो लिया करो
ना आए पढ़ना तो चित्र तो देख
लिया करो।
तू नशा कितनो की
जिंदगियां बर्बाद करेगा
किसी के मांग का सिंदूर छीन लिया
तो किसी के सिर से
पूरी कायनात छीन ली
किसी के सहारे को खत्म कर दिया
तो किसी को अपने ही
घर से बेदखल कर दिया...
























