पड़ाव
मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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उठ गए पड़ाव छीन गई छाया
जैन से ना कोई आया ना कोई गया
धूप, धूप पड़ती है हरदम पड़ती रहे
धो कन्नी चलती है चलती रहे हरदम
गरम मौसम गर्म रेत गरम गाड़ियों के द्वार
आया कोई चला गया कोई
उठ गया किसी पड़ाव में जिंदगी का पडाव
छोड़ गए माटी कोई जन परिजन की
आ गया लेकर कोई खुशी न येजीवन की
हर पलाश हर दूब का तिनका
परिचित है इनके शौर्य
श्वेद रिस गया इनका कण-कण माटी में
रिसे रिसे पसीने ने फिरकी गुहार
बिछ गए पड़ावछनक गई चूडियां
झनक उठी झांझरे मुकुल भी महक उठा
हर कोई थिरक रहा मालव की माटी पर
परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ीआप शासकीय सेव...
























