पचपन में बचपन की बातें
हंसराज गुप्ता
जयपुर (राजस्थान)
********************
जब जब नववर्ष मनाते हैं, बीते पल सपनों में आते हैं,
पचपन में बचपन की बातें, हँस बच्चों संग बतियाते हैं.
साथ मनाते दिन त्योहार, कहीं हाल पूछने जाते हैं,
मोरपंख शंख हो बस्ते में, साथी मिल जाये रस्ते में,
एक दूजे को खडे खडे, जीवन पूरा कह जाते हैं,
पचपन में बचपन की बातें, सच हैं, विश्वास दिलाते हैं,
बीते पल सपनों में आते हैं।
पहला प्यार, छाती की धार, सृजन का सुख, सारा संसार,
रुदन उत्पात में दूध दुलार, सोई-जागी संग लोरी-मल्हार,
सूखा मुझको, गीले में आप, सर्वस्व समर्पण,सोच ना ताप,
गुस्सा, लात, दोष सब माफ, प्रतिकार मुझसे,कहलाता पाप.
अब नन्हा-माँ दोनों शर्माते, दूध बोतल में, चाय पिलाते,
तब दही छाछ,माखन खाते, पकडी बकरी,मुँह धार लगाते,
हँसते सब धूम मचाते हैं, बीते पल सपनों में आते हैं,
पचपन में बचपन की बातें, सच हैं, विश्वास दिला...






















