बचपन का जमाना
सपना मिश्रा
मुंबई (महाराष्ट्र)
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याद आता है।
वो गुजरा जमाना,
बहुत याद आता है।
मिट्टी की सोंधी खुशबू,
वो गांवों की हरियाली,
वो पेड़ों की डाली,
बहुत याद आता है।
वो खेती और बारी,
फसलों पर बैठ,
चिड़ियों का चहचहाना,
मचान पर चढ़कर
जोर-जोर से चिल्लना,
बहुत याद आता है।
बारिश का पानी,
वो कागज के नाव,
उसमें चींटी की सवारी,
बहुत याद आता है।
वो पत्थर और पानी,
वो गुल्ली और डंडा,
वो छुप्पम-छुपाई,
बहुत याद आता है।
ऊंचाई से तालाबों में कूदना
और छपाक की आवाज़ आना,
वो झुंडो की मस्ती,
एक अलग सा याराना,
बहुत याद आता है।
दादी नानी की कहानी,
मां का लोरी सुनाना,
स्कूल ना जाने का,
हर रोज एक नया बहाना बनाना,
बहुत याद आता है।
याद आता है,
वो बचपन का जमाना
बहुत याद आता है।
परिचय :- सपना मिश्रा
निवासी : मुंबई (महाराष्ट्र)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं...






















