जय जवान जय किसान
विरेन्द्र कुमार यादव
गौरा बस्ती (उत्तर-प्रदेश)
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जय जवान जय किसान
हरा भरा जो करे खेत और खलिहान,
यही है देश के सच्चे किसान की पहि चान।
देश में नहीं है पानी की कमी,
फिर भी क्यों सूखी रहती देश की जमी।
जिसे जानना है वो जाने,
जिसे पहचानना हो वो पहिचाने।
किसान ही उपलब्ध कराये
देश को खाने के दाने,
जो खेती-बारी हैं देखे,
वही किसान को पहिचाने।
किसान देश का है अन्न-दाता,
लेकिन खुद भूखा है रह जाता।
कर्ज के बोझ के तले वह है दब जाता,
फिर भी किसान का देश व
परिवार से है अटूट नाता।
किसान धरती माँ का बेटा कहलाता,
किसान का ही बेटा देश की
सीमा पर सैनिक बनके है जाता।
वह सहर्ष देश की रक्षा में
अपने को कर देता कुर्बान,
गर्मी हो या सर्दी आधी हो या तुफान।
करते देश की सेवा देकर अपनी जान,
क्या देश उनको दे पाता
पूरा इज्जत व सम्मान।
जो दे देते हंसते-हंसते
अपने देश के लिए जान।।
कहाँ है वे देश के लाल...

























