प्रेम पथ
होशियार सिंह यादव
महेंद्रगढ़ हरियाणा
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प्रेम मार्ग अति कठिन, चलना होता मुश्किल,
जब तक राह नहीं चले, लगती है झिलमिल,
जब चल पड़ते राह पर, कठिन हो तिल तिल,
खुशी और गम मिले, मंजिल जब जाये मिल।
हीर-रांझा चले राह पर, अंतिम मौत ही पाई,
सोहनी और महिवाल ने, प्रेम पथ ही निभाई,
कभी-कभी इस मार्ग में, मिले बड़ी कठिनाई,
कभी-कभी इस राह में, ,चलकर नाम कमाई।
प्रेम पथ कांटों भरा होता, चलना संभल संभल,
प्रेम पथ पर चलकर ही, प्रेमी दूर जाता निकल,
प्रेम पथ एक दरिया हो, कितने हो चुके विफल,
प्रेमी दर्द में चलते रहते, अंत में होते हैं सफल।
प्रेम मार्ग पर जब चले थे, शीरी और फरियाद,
प्रेम बात जब चलती है, उनको करते सब याद,
प्रेमी युगल आगे बढ़ता नहीं करता वो फरियाद,
प्रेम पथ पर सफल रहा, जग करता उनको याद।
प्रेम पथ एक सागर है, कितनों ने नैया उतारा है,
कुछ उतर गये कुछ डूबे, कितने जन पछताए हैं,
कि...






















