दोहरा मापदंड क्यों…?
छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
********************
मैं बेटी हूँ
सिर्फ इसलिए ही
जन्म से पहले
कोख में मार दी जाती हूँ
कहाँ चली जाती है
ममतामयी माँ की ममता
क्यों आँखे मूंद लेते हैं
सरंक्षक कहलाने वाले पिता
क्यों उत्प्रेरक बन
सहयोगी बन जाता है समाज
कैसी विडम्बना है
सब कुछ होता है
मर्यादा की ओट में ...
खैर ..., ईश्वर कृपा से
जन्म ले लेती है धरा पर
अधिकांश बेटियाँ
पर ... हर कदम दोहरापन
थाली बजाई जाता है
बेटे के जन्म पर
लड्डू बाँटे जाते हैं
बेटे के जन्म पर
और.... बेटियाँ
डूबो दी जाती है
मायूसी के समंदर में ...
युवा होती बेटियाँ
मगर... कहाँ अवसर मिलता
पंख फैलाने को
इसी धर्म धरा पर
पैदा हुई थी मैत्री, गार्गी ...
यहीं पूजी जाती है
लक्ष्मी, दुर्गा, काली, सरस्वती
देश की आँख का नूर रही
लक्ष्मी बाई, इंदिरा,
सुनिता विलियम
मर्दो के कंधे स...




















