गणपति बप्पा : ज्ञान के दाता
राकेश कुमार दास
पिपिलि, पुरी
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हे विघ्नहर्ता गणपति बाप्पा,
हर शुभारंभ के आधार।
तेरे बिना यह जग सूना है,
तू ही है ज्ञान का भंडार॥
विद्यालय से मंदिर तक,
तेरा ही गुणगान।
तेरे नाम से खिलते हैं,
विद्या के उद्यान॥
शिवपुत्र! जब शीश गंवाया,
फिर भी दिखाया ज्ञान का प्रकाश।
तेरे आशीष से जग ने पाया,
विद्या का अनमोल विश्वास॥
शिक्षा से जीवन होता है उज्जवल,
अज्ञान से होता पतन।
तेरी कृपा से मिटते अंधेरे,
ज्ञान बनता जीवन धन॥
ना कोई वंचित शिक्षा से हो,
सबको मिले तेरा आशीर्वाद।
तेरी शरण जो आए गणपति,
उसका जीवन हो सफल और आबाद॥
तेरी मूर्ति में है आस्था,
तेरे चरणों में है विश्वास।
गणपति बाप्पा मोरया...
मंगल मूर्ति मोरया...॥
परिचय : राकेश कुमार दास
निवासी : पिपिलि, पुरी
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।
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