तू नजर आया
सुरेखा सुनील दत्त शर्मा
बेगम बाग (मेरठ)
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रात को जब चांद में, मुझे तू नजर आया
रात में बस ख्वाब में, मुस्कुराता नजर आया।
ख्वाबों में तेरा चेहरा, यूं पास नजर आया
इश्क मोहब्बत का चढ़ता, खुमार नजर आया।
किस से कहें दिले, जज्बात ए दास्तां
किस्सा कई बार बहुत, पुराना याद आया।
तुझे भी तो ये चांद कहीं, दिखता होगा
बता ..क्या उसमें तुझे मेरा, चेहरा कभी नजर आया।
जमाने को जब भी देखा, इन निगाहों ने
मुझे चारों तरफ बस, तू ही तू नजर आया।
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परिचय :- सुरेखा "सुनील "दत्त शर्मा
जन्मतिथि : ३१ अगस्त
जन्म स्थान : मथुरा
निवासी : बेगम बाग मेरठ
साहित्य लेखन विधाएं : स्वतंत्र लेखन, कहानी, कविता, शायरी, उपन्यास
प्रकाशित साहित्य : जिनमें कहानी और रचनाएं प्रकाशित हुई है :-
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