सावन
चेतना ठाकुर
चंपारण (बिहार)
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सावन की अगुवाई में,
हरी हुई पूरी धरती है।
मेहंदी लगा।
हरी चूड़ी पहनने की कोशिश करती,
हर नव युवती है।
सावन की बाला को देखो,
हरी चोली, घाघर, चुनरी, लहरा के,
कैसे बलखा चलती है।
जैसे डाली हो फुलो की,
जैसे मोरनी हो उपवन की,
सावन में मचलती है।
सावन की अगुवाई में,
हरी हूई पूरी धरती हैं।
मौसम की जवानी,
सावन में बसती है।
सोमवारी का व्रत कर युवतियां,
सावन मास के देव शिव से,
साजन मांगा करती है।
राग और नवराग लिए,
झूला झूला करती है।
सावन की अगुवाई में,
हरी हूई पूरी धरती है।
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लेखक परिचय :- नाम - चेतना ठाकुर
ग्राम - गंगापीपर
जिला -पूर्वी चंपारण (बिहार)
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