हे नारी
मनीषा व्यास
इंदौर म.प्र.
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हे नारी
सृष्टि की रचना धार
चुप न बैठो।
समय सतयुग का नहीं है
ख़ामोश न बैठो,
विनाशकारी कलयुग कुंडली मारकर बैठा है
तुम्हें ही क्रांति की तलवार उठाना है,
चुप न बैठो।
वर्तमान में समाज
बहरा है, इंसानियत
गूंगी है, ऐसे में अश्रु
व्यर्थ न गंवाओ
शस्त्र उठाओ
चुप न बैठो
इस राक्षसी दरबार में
तुम किससे आस लगाओगी चंडी बन
बलात्कारियों की
मुंड मालाएं तुम ही
शिव को चढ़ाओगी।
चुप न बैठो
परिचय :-
नाम :- मनीषा व्यास (लेखिका संघ)
शिक्षा :- एम. फ़िल. (हिन्दी), एम. ए. (हिंदी), विशारद (कंठ संगीत)
रुचि :- कविता, लेख, लघुकथा लेखन, पंजाबी पत्रिका सृजन का अनुवाद, रस-रहस्य, बिम्ब (शोध पत्र), मालवा के लघु कथाकारो पर शोध कार्य, कविता, ऐंकर, लेख, लघुकथा, लेखन आदि का पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन एवं विधालय पत्रिकाओं की सम्पादकीय और संशोधन कार्य
आप भी अपनी कवित...
























