पिता दामाद से क्या कहता है…
श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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पहला व्यक्ति जिसने
इस लाडली को गोद में लिया
वो मैं था, तुम नहीं ,
पहला अधिकार मेरा था
जब पहली बार मैंने
इसके माथे को चूमा
तुम्हारा नहीं !
पहली मुस्कान उसकी,
पहले आंसू, उसके मैंने देखे,
उसे अपनी नन्ही
राजकुमारी कहा,
वो मैं ही था, तुम नहीं !
दुनिया की सबसे सुन्दर
बेटी की निश्छलता, निर्मलता,
कोमलता मैंने देखी,
प्यार, नाज़, और दुलार से पाला,
सम्मान और कर्तव्य सिखाये
सबसे पहला पाठ पढ़ाया,
वो मैं ही था!
उसे साहस-ताकत का
अध्याय सिखाया,
पूरे दिल से प्यार देकर पाला !!
आज मैं तुम्हें वहीं सम्मान देता हूँ ,
जिस सम्मान के अधिकारी बने तुम
इसके कारण!
इसी प्यार-सम्मान, से उसे सवांरना,
जो आज तक उसे मैंने दिया है,
उसकी रक्षा करना !
दर्द क्या होता है वो नहीं जानती,
तुम अब वो पुरुष बनोगे,
जि...


















