पाती एक जीव की
श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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इंसानो ने पत्थर का
कलेजा बनाया होगा
तभी उसमें इतनी नफरत,
क्रोध, हिंसा को समाया होगा,
हम हैं एक जीव ये
भूल गया होगा
हमे भी उसके जैसे
ईश्वर ने ही बनाया होगा!
भूल गया इंसान
हमारे वज़ूद को
नहीं होता आभास हमारे
दर्द भरी पुकारों का!,
हम तरसते रहते थोड़े से
प्यार और ममता के लिए,
घायल तन, व्यथित मन
बोझिल कदम लिए,
कभी तो हमारे अस्तित्व
का उनको संज्ञान होगा,
उनके दिलों में हमारे लिए भी
करुणा और प्यार होगा!
चोट नहीं, दुत्कार नहीं,
स्नेह का दीपक कभी
तो जलाया होगा!!
हे मानव तुम मे से ही
कोई मसीहा कहीं जगा होगा,
हमारे दर्द भरी
कराहटों को सुना होगा,
प्यार के मलहम से
हमे संवारा होगा
उस मसीहा ने ही
धरती पर हम सबके
संरक्षण का प्रण लिया होगा,
तभी तो बच पाए हैं हम
"जानवर" इस धरती पर
हम में भी...



















