नव बना रहे हिंदुस्तान
डॉ. निरुपमा नागर
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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संवत विक्रम,
करते हैं तुम्हें नमन।
"नाल" बन सूर्य राजा
संग लाये नव चितवन।
है नवागत गुड़ीपड़वा,
चैत्र उत्सव का जलवा,
बैसाखी देती मन पुरवा।
राजीवलोचन आये पलना
झूलेलाल की हुंकार महान
नवरोज़ की भी है शान
अमृतफल से लाड
गया उद्यान।
आ गया, नव
पल्लव, नव धान।
वसुधैव कुटुंबकम्
की तुम पहचानो।
नव निधि साथ के लिए,
नव बना रहे हिंदुस्तान।
संवत विक्रम "नाल" कहलाते हैं
और स्वामी सूर्य भगवान हैं
परिचय :- डॉ. निरुपमा नागर
निवास : इंदौर (मध्यप्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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