पिता होना आसान नहीं होता
शशि चन्दन
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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गगन चूमती इमारत का, नींव का
पत्थर होना आसान नहीं होता।।
कि अपने मुस्कुराते अधरों से,
हलाहल पीना आसान नहीं होता।।
रात को शीतल चांद, दिन को
सूरज सा तपना आसान नहीं होता।
कि इस मायावी जग में, निस्वार्थ
प्रेम करना आसान नहीं होता ।।
अपने खून पसीने से एक कोरी
किताब लिखना आसान नहीं होता।।
कि साध कर भागते समय को,
गीता बाँचना आसान नहीं होता।।
निर्मल कोमल हृदय को सक्ता का,
आवरण ओढ़ना आसान नहीं होता।
कि घर बाहर की जिम्मेदारियों को,
कांधे ढोना आसान नहीं होता।।
नर्म नर्म कलियों को सहेज,
ओक में भरना आसान नहीं होता ।
कि लड़खड़ाते कदमों को,
एक सही दिशा देना आसान नहीं होता।।
जीवन के खेल में, जीतकर भी
हारना आसान नहीं होता।
बैठ कर जमीन पर दिन में तारे
देखना आसान नहीं होता।।
फटे हाल घिसे जूते लिए, कड़ी
धूप में चलना...


















