आदर्श
राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
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उनके लिए वो भद्दे परिपाटी
जिसका आज चलन है,
पर हम वंचितों का,
बहुजनों का आदर्श
बंदूक नहीं कलम है,
तलवार से भी खतरनाक
कलम को ही माना गया है,
इसे ही सबसे शक्तिशाली
जाना गया है,
सत्ता को भी कलम
गूंगी कर देती है,
शक्तिहीनों में भी
ताकत भर देती है,
सदियों से चली आ रही
व्यवस्था के
हम घोर विरोधी हैं,
हम बुद्धत्व के संबोधि हैं,
भले ही हम हजारों सालों तक
कागज कलम से दूर रहे,
अपढ़ता का अभिशाप
झेलने मजबूर रहे,
उनकी बस्तियों से दूर रहे,
उनके खंडित करते नियम
हमारे लिए नासूर रहे,
पर कलम की कसक
हम दिलों में पाले थे,
शिक्षा के लिए खुद को
संभाले थे,
तब अंग्रेज आये,
वे उन्हें नहीं सुहाए,
लेकिन हमें उन्होंने
स्कूल की राह दिखाए,
पढ़ाए, समता की
बात सिखाये,
हम शिक्षा का साथ
ताउम्र नहीं छोड़ेंगे,
कलम उठाएंगे...


















