हाथी
मीना भट्ट "सिद्धार्थ"
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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भारी भरकम भूरा काला।
आता हाथी है मतवाला।।
रहती विशाल उसकी काया।
पैर चारपाई के पाया।।
सूँड बड़ी लंबी है जिसकी।
पटकी देना आदत उसकी।।
देख उसे हर कोई डरता।
हरी-हरी पत्ती को चरता।।
एक महावत उस पर बैठा।
हाँके उसको रहता ऐंठा।।
माँ लक्ष्मी की बने सवारी।
करते पूजन सब नर नारी।।
उस पर बैठे बच्चे झूमें।
बार-बार उसको हैं चूमें।।
हाथी राजा हैं कहलाते।
हर कोई उनके गुण गाते।।
लगा रहे जगंल के चक्कर।
मिट्टी में लोटें वह अक्सर।।
सूरत लगती सबको प्यारी।
ढोते गट्ठर भारी-भारी।।
कोई केले उसे खिलाता।
पकड़ सूँड से हाथी खाता।।
ख़ूब नहाता वह पानी से।
सब ख़ुश हों इस नादानी से।।
पापा लाओ मेरा हाथी।
हाथी बस मेरा है साथी।।
परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ"
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम...























