सात अधोलोक
सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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हिंदू पुराणोंके अनुसार
कुल मिलाकर सात अधोलोक हैं
अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल।
अतल की गहराइयों में इच्छाओं का वास है,
जहाँ माया मुस्काती है, भोगों का प्रकाश है।
वहाँ सत्य भी छल बन जाए, ऐसा उसका जाल,
मनुष्य अपने ही मन में खो दे विवेक का हाल।
वितल में वैभव रहता, स्वर्ण समान चमकता,
लोभ की चकाचौंध में हर विवेक है भटकता।
धन ही देव बन बैठा, कर्म हुआ है मौन,
जहाँ सुख क्षणिक लगते हैं, शांति रहती कौन?
सुतल वह तल है जहाँ बलि का शासन गाया,
अहंकार को त्याग जहाँ विष्णु ने सिखलाया।
दमन नहीं, मर्यादा है वहाँ का विधान,
त्याग से ऊँचा होता है सच्चा इंसान।
तलातल और महातल, भय और विष के धाम,
असुरों की आकांक्षाएँ, अंधकार का नाम।
क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष यहाँ साँसों में पलते,
मानव मन के राक्षस भी यहीं आकर ढलते।
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