हां रामसकाल आ गया है
राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
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जयंती समारोह के
एक कार्यक्रम में
कड़वे आसवित जल के
सुरूर लेकर वो आ गया,
सीधे आयोजकों
से टकरा गया,
बोला बैनर जो टंगा है
उसमें मेरा क्यों चित्र नहीं है,
कार्यकर्ताओं में मेरा
कोई मित्र नहीं है,
इसीलिए इस बैनर
को यहां से हटाओ,
मेरे फोटो वाला
बैनर लगाओ,
एक युवा कार्यकर्ता
तमतमा गया,
भयंकर गुस्से में आ गया,
समता समानता के
इस कार्यक्रम में
कोई किसी पर
दबाव नहीं बनाएगा,
कोई अपनी राजनीति
नहीं चमकाएगा,
दूर दूर से भी और कुछ
पास से अतिथि आये,
कार्यक्रम के उद्देश्य और
अपने विचार बताये,
मगर रामसकाल कभी
नजदीक बैठता तो कभी दूर,
पूरे कार्यक्रम के दौरान
कम नहीं हुआ उनका सुरूर,
कभी कहता कि इन
सब का खर्चा मैंने उठाया है,
मेरे कारण आयोजन
सफल हो पाया है,
उस दिन एक मछली
तालाब कैसे गंदा करता है,
सकार...


















