कारगिल के शूरों की वाणी
डॉ. पंकजवासिनी
पटना (बिहार)
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सिंह हम दहाड़ कर!
शत्रु को पछाड़ कर!!
सबक दिया पाक को
झंडा अपना गाड़ कर!!
कर उठे जो सिंहनाद!
अरि कहाँ फिर आबाद!!
राष्ट्र हवन कुंड में
आहुति का आह्लाद!!
करके वज्र हुंकार!
शत्रु को चीर - फाड़!!
कर भस्म समर में
पहने हम विजयहार!!
राष्ट्र कोई मेष नहीं!
पाक सिंह-वेश नहीं
जो ले दबोच अंक में
हिंद कोई दरवेश नहीं!!
अरि के हर घात का
सौ सौ प्रतिघात का
दिया मुँहतोड़ जवाब
हर विश्वासघात का!
हम नहीं हैं डरने वाले!
मातृभूमि पर मरने वाले!!
पग तले कुचलके मसलके
अरि का गर्व हरने वाले!!
परिचय : डॉ. पंकजवासिनी
सम्प्रति : असिस्टेंट प्रोफेसर भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय
निवासी : पटना (बिहार)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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