खुद को जानो
जयप्रकाश शर्मा
जोधपुर (राजस्थान)
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खुद को जानो और
खुद की अहमियत पहचानों
क्योंकि ये स्वर्णिम वक्त
निकल जाने के बाद
कोई भी नहीं लौटा पायेगा
आपके माता पिता भी नहीं
छोटे थे हर बात भूल जाया करते थे
दुनियाँ कहती थी याद करना सीखो
बडे़ हुए तो हर बात याद रहती है
दुनियाँ कहती है भूलना सीखो
सभी समय-समय की बातें है
बैठे-बैठे कैसा दिल घबरा जाता है
जाने वालों का जाना याद आ जाता है
ज़िंदगी से बड़ी सजा ही नहीं
और क्या जुर्म है पता ही नहीं
खुद को जानो और
खुद की अहमियत पहचानों
परिचय :- जयप्रकाश शर्मा
निवासी : जोधपुर (राजस्थान)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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