झरोखे के नज़दीक
कीर्ति सिंह गौड़
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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वो झरोखे के
नज़दीक बैठी रही
बारिश की
बूँदों के इंतज़ार में,
प्रीतम के दीदार में।
उम्मीद कि जब
बौछारें आएँगी तो
उसका मुरझा चुका प्रेम,
उन बारिश की बूँदों से
फिर पनप जाएगा,
लहलहा उठेगा उसका
मन प्रीतम के आगमन पर।
पर बूँदों ने भिगोया
सिर्फ़ उसके आँचल को
धोया उसकी
आँखों के काजल को।
मन पर बेरहम
एक बूँद भी न पड़ी,
और उसका मुरझाया
हुआ प्रेम सूखता रहा।
फिर भी झरोख़े के
नज़दीक बैठी रही वो,
बारिश की
बूँदों के इंतज़ार में,
प्रीतम के दीदार में।।
परिचय :- कीर्ति सिंह गौड़
निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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