बंधन सारे टूट रहे हैं
प्रो. आर.एन. सिंह ‘साहिल’
जौनपुर (उत्तर प्रदेश)
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बंधन सारे टूट रहे हैं
साथी सारे छूट रहे हैं
कैसे पहुँचे मंज़िल डोली
जब कहार ही लूट रहे हैं
गेह प्रेम के सूखे है अब
धन वैभव के भूखे है सब
अहं सातवें आसमान पर
देख पसीने छूट रहे हैं
रंगहीन संसार लग रहा
इंसां का अरमान जल रहा
कश्ती बिन पतवार चल रही
नाविक भी अब रूठ रहे हैं
शुचिता टंगी हुई खूँटी पर
सच को चढ़ा दिया सूली पर
ख़ुशी के ग़ुब्बारे सारे ही
एक एक करके फूट रहे हैं
संबंधी का टोटा है अब
बहुरैंग़े ख़ुशियों के दिन कब
साहिल जिए भरोसे किसके
मालिक तुमसे पूँछ रहे हैं
परिचय :- प्रोफ़ेसर आर.एन. सिंह ‘साहिल’
निवासी : जौनपुर उत्तर प्रदेश
सम्प्रति : मनोविज्ञान विभाग काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
रुचि : पुस्तक लेखन, सम्पादन, कविता, ग़ज़ल, १०० शोध पत्र प्रकाशित, मनोविज्ञान पर १२ पुस्तकें प्रकाशित, ११...























