कोई कह दो की ये सब खत्म होगा
माधवी मिश्रा (वली)
लखनऊ
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जिधर भी देखती हूँ रात्रि का पहरा जड़ा है
पराजित हो तिमिर से भाष्कर जड़वत खडा है
उजालो का कोई साथी यहाँ का तम हरेगा
कोई कह दो की ये सब खत्म होगा
समय के सामने रख कर करारी हार का शव
अगर तू पूछता है क्यूँ हुआ इतना पराभव
नहीं ये सच नही कह कर हमारा भ्रम हरेगा
कोई कह दे की ये सब खत्म होगा
कहाँ से आ गया भटका हुआ मनहूस साया
जहाँ जो भी मिला इससे वही है मात खाया
मिलेगा कौन जो अभिमान इसका कम करेगा
कोई कह दो की ये सब खत्म होगा
हमारी वत्सला धरती कभी क्या फिर हरी होगी
विविध आभूषणो से युक्त मुक्ता की लड़ी होगी
कौन फिर आ सकेगा जो की इसका क्रम बनेगा
कोई कह दो की ये सब खत्म होगा।
परिचय :- माधवी मिश्रा (वली)
जन्म : ०२ मार्च
पिता : चन्द्रशेखर मिश्रा
पति : संजीव वली
निवासी : लखनऊ
शिक्षा : एम.ए, बीएड, एलएल बी, पीजी डी एलएल,...

























