भोली प्रार्थना
डॉ. पंकजवासिनी
पटना (बिहार)
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गर्वीले चाँद के आलोक में!
उसका अक्षत आशीष ले!!
चलनी के आवरण में!!!
जो देखा तुम्हें :
तेरे अधरों पर थिरक उठी
उषा - सी गुलाबी मुस्कान में
देखी मैंने
अपनी अरुणाभ छवि!!
और पा गई
अपनी जन्मभर की तपस्या
और समर्पण का सुफल!!
सारे सिंदूरी सपने!
सजन तुझसे हुए अपने!!
तुम्हारे प्रीत की यह रागारुण चूनर!
सदा रहे मेरे माथ!!
अखंड सौभाग्य बन!!!
ताउम्र नसीब होती रहे
तेरे हाथों पारणा का
ये पहला निवाला!
तुम मेरे भोले मन
की निश्चल प्रार्थना!!
मीत! तुझ संग लिखूँ
प्रीत की अमिट इबारत!!!
परिचय : डॉ. पंकजवासिनी
सम्प्रति : असिस्टेंट प्रोफेसर भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय
निवासी : पटना (बिहार)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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