सबकुछ बता दिया है मुझको दर्पण ने
रशीद अहमद शेख 'रशीद'
इंदौर म.प्र.
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कमी दृष्टिगत हुई मुझे कुछ ही क्षण में!
सब कुछ बता दिया है मुझको दर्पण ने!
कहाँ लगी है कालिख मुख पर!
किधर मृदा बैठी है सिर पर!
कैसे हैं उलझे से केश,
कैसा है नयनों में काजर!
कान खड़े कर दिए अनसुने भाषण ने!
सब कुछ बता दिया है मुझको दर्पण ने!
प्रश्न पूछता मुखमंडल है!
जाने क्यों माथे पर बल है!
लज्जावश छाई है लाली,
गिरने को आतुर दृग-जल है!
निन्दा की है मेरी भू के कण-कण ने!
सबकुछ बता दिया है मुझको दर्पण ने!
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परिचय - रशीद अहमद शेख 'रशीद'
साहित्यिक उपनाम ~ ‘रशीद’
जन्मतिथि~ ०१/०४/१९५१
जन्म स्थान ~ महू ज़िला इन्दौर (म•प्र•) भाषा ज्ञान ~ हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, संस्कृत
शिक्षा ~ एम• ए• (हिन्दी और अंग्रेज़ी साहित्य), बी• एससी•, बी• एड•, एलएल•बी•, साहित्य रत्न, कोविद
कार्यक्षेत्र ~ सेवानिवृत प्राचार्य
सामाजिक गतिविधि ~ मार्गदर्शन और प्रेर...






















