स्वप्न सुनहरे
कु. हर्षिता राव
चंदू खेड़ी भोपाल म.प्र.
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हर ढाल बनकर जो खड़े हैं
अपनें-परायों से लड़े हैं।
विश्वास बनूंगी मैं उनका
इतिहास रचूंगी इस युग का।।
इक तड़ित सा तेज़ बनकर
माता पिता का ओज बनकर।
पर्वतों के जैसे तनकर,
उनके जैसे ही मैं थमकर।।
जाग जाऊं सुबह बनकर
शांत हो जाऊं निखरकर।
क्रांति लाऊंगी जो अब मैं
अपने जीवन के सफ़र में।।
रोशन हो जाऊं कहर में
जीत जाऊं हर लहर में।
रोशन होकर जगमगाऊ,
इक नई सुबहो जगाऊं।।
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परिचय : कु. हर्षिता राव
पिता - श्री रमेश राव पेंटर (प्रेरणा स्त्रोत)
निवासी - चंदू खेड़ी भोपाल म.प्र.
शिक्षा - एम.ए.हिंदी साहित्य में अध्ययनरत,
राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस) की स्वयं सेविका एवं सामाजिक कार्यकर्ता।
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