फूल तुम्हें भेजूंगी
सुरेखा सुनील दत्त शर्मा
बेगम बाग (मेरठ)
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हर सुबह खिलता हुआ,
फूल तुम्हें भेजूंगी,
अपने इश्क में डूबा हुआ,
एहसास तुम्हें भेजूंगी,
ये बताने को कि अब,
रुकते नहीं अश्क,
अश्कों की बूंदों से भीगा हुआ,
फूल तुम्हें भेजूंगी,
अपनी तन्हाई का एहसास,
दिलाने के लिए,
रोज एक महका हुआ,
गुलाब तुम्हें भेजूंगी,
अब हाल क्या है मेरा,
तेरी जुदाई में,
फिर वही दर्द भरा,
अंदाज़ तुम्हें भेजूंगी,
आज फिर इस दिल को,
रुलाया तुमने...
आज एक मसला हुआ फूल,
नए अंदाज में तुम्हें भेजूंगी....!!
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परिचय :- सुरेखा "सुनील "दत्त शर्मा
जन्मतिथि : ३१ अगस्त
जन्म स्थान : मथुरा
निवासी : बेगम बाग मेरठ
साहित्य लेखन विधाएं : स्वतंत्र लेखन, कहानी, कविता, शायरी, उपन्यास
प्रकाशित साहित्य : जिनमें कहानी और रचनाएं प्रकाशित हुई है :-
पर्यावरण प्रहरी मेरठ, हिमालिनी नेपाल, हिंदी रक्षक मंच (hindirakshak.com) इंदौर, कवि कुंभ...















