खुली खिड़की
संजय वर्मा "दॄष्टि"
मनावर (धार)
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जब खिड़की
खोलकर देखता हूं
बाहर का नजारा
चिड़ियों की चहक
दोस्तों का दिखना
ठंडी हवा
फूलों की खुशबू
कर देती मन को ताजा
सूरज की किरणें
घर में उजास भर देती
जब सुबह खिड़की खोलती।
अब मेरी आदत
खिड़की खोलने की
चिड़ियों ने चहचाहट
कर रोज़ डाल दी
अब महसूस हुआ
प्रकृति कितनी सुंदर है
ऐसा लगता
तितलियां,
भोरें और पंछी
मानो मेरा
अभिवादन कर रहे हो।
परिचय : संजय वर्मा "दॄष्टि"
पिता : श्री शांतीलालजी वर्मा
जन्म तिथि : २ मई १९६२ (उज्जैन)
शिक्षा : आय टी आय
निवासी : मनावर, धार (मध्य प्रदेश)
व्यवसाय : ड़ी एम (जल संसाधन विभाग)
प्रकाशन : देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ व समाचार पत्रों में निरंतर पत्र और रचनाओं का प्रकाशन, प्रकाशित काव्य कृति "दरवाजे पर दस्तक", खट्टे मीठे रिश्ते उपन्यास कनाडा-अंतर्राष्ट्रीय स्तर...
















