रोशनी
संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया
भोपाल (मध्यप्रदेश)
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अपना सूरज खुद बन जाओ।
अपने मन-मंदिर में रोशनी,
फैलाते चलो दिव्य रोशनी,
जगमग करते चलो।
अपने कर्म श्रेष्ठ करते चलो।
मन सुंदर स्वच्छ बनाओ।
फिर स्वत: ही मन उजाला,
ही उजाला फैला जाएगा।
सेवा भाव रख कर श्रेष्ठ,
कर्म करते चलो जिससे,
दूसरों के जीवन को सुमन,
सा महका कर खुशबू फैला दें।
परिचय :- श्रीमती संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया
निवासी : भोपाल (मध्यप्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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