तुझमें है काबिलियत
महेन्द्र साहू "खलारीवाला"
गुण्डरदेही बालोद (छत्तीसगढ़)
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नापना हो डगर तुझे,
लांघ जाना हो पर्वत।
मुश्किलों से ना घबराना,
आ जाए कोई आफत।।
राह में तेरे रोड़े अटकाए,
बाधाएं अनगिन टकराए।
साहस कभी ना खोना तुम,
आ जाए कोई मुसीबत।।
दोगले भी मिलेंगे राहों में,
आदमी की परख कर लेना।
पग नापना फूँक-फूँक कर,
चाहे कोई दे तुम्हें नसीहत।।
रौंदे जाते यहां ईमान-धरम,
सत्य का पैर जमाए रखना।
पहचान भीड़ में बना जाना,
तुझमें ही है इंसानियत।।
मुकाबला जरा डटकर करना,
बन जाना अभिमन्यू तुम।
तोड़ जाना चक्रव्यूह,कौरवों का,
है तुझमें ही काबिलियत।।
परिचय :- महेन्द्र साहू "खलारीवाला"
निवासी - गुण्डरदेही बालोद (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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