अथाह अनुभूति
राजीव डोगरा "विमल"
कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
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हजारों तंत्र हो मुझ में
हजारों मंत्र हो मुझ में
मैं फिर भी लीन रहू तुझ में।
न ज्ञान का अहंकार हो मुझ में
न आज्ञान का भंडार हो मुझ में
मैं फिर भी लीन रहू तुझ में।
योग का भंडार हो मुझ में
तत्व का महाज्ञान हो मुझ में
मैं फिर भी लीन रहू तुझ में।
न जीत का एहसास हो मुझ में
न हार का ह्रास हो मुझ में
मैं फिर भी लीन रहू तुझ में।
न जीवन की चाह हो मुझ में
न मृत्यु की राह हो मुझ में
मैं फिर भी लीन रहू तुझ में।
परिचय :- राजीव डोगरा "विमल"
निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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