सैलाब
मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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यादों के सैलाब में
घूम गया कोई
हवा के झोंकों सा
छू गया कोई
आया कोई
तनहाई सा
छा गया मंत्र
सुमन सौरभ सा मन
बहला गया कोई।
सोचा यथार्थ है या स्वप्न
कुछ समझ नहीं पाई
कभी आभास होता
बहुत करीब है कोई बहुत
होता कभी आभास
दूर बहुत दुर।
चला गया कोई,
चला गया कोई।
परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं व वर्तमान में इंदौर लेखिका संघ से जुड़ी हैं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित क...






















