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कविता

कोशिश हो रफ्तार की
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कोशिश हो रफ्तार की

विजय गुप्ता दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** उमर असर तो होगा पर, कोशिश हो रफ्तार की। बस इतनी चले जुबान, चर्चा सुनो कुछ धार की। तानों से कुछ भटके तो, गानों से फिर महके भी शानों में कभी जो अटके, सम्मानों संग चहके भी जीवन के हैं स्वर्ण रथी, सारथी सोच परिहार की। अश्व चाल के चिन्ह मिले, जहां दिशा परिवार की उमर असर तो होगा पर, कोशिश हो रफ्तार की। बस इतनी चले जुबान, चर्चा सुनो कुछ धार की। आधी दोस्ती मतलब ही, दुश्मनी आधी सुनते हैं। शतरंज मोहरे जैसे फिर, कदम चाल में घिरते हैं। खट्टे मीठे अनुभव पाते, ऐसी बातें कुछ यार की। कपट विश्वास का पुल, नैय्या कथा मझधार की। उमर असर तो होगा पर, कोशिश हो रफ्तार की। बस इतनी चले जुबान, चर्चा सुनो कुछ धार की। गाड़ी जैसा होता जीवन, समतल पर रुकावट भी मिले सही डॉक्टर मिस्त्री, थोड़ी कभी बनावट भी थकावट वाले कलपुर्जे, चाहत सच्चे हथियार की।...
ओ मेरे बचपन के साथी
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ओ मेरे बचपन के साथी

हंसराज गुप्ता जयपुर (राजस्थान) ******************** गुड्डे-गुडिया, चूरन की पुडिया, किसकी मां किसको दे जाती, सांझ-सवेरे, खेल-घनेरे, बेईमानी सबको भाती, कुश्ती मस्ती खींचातानी, हों-हों खो-खो बहुत सुहाती, ओ मेरे बचपन के साथी! अजीतगढ़ से चिमनपुरा, फिर से पैदल की मन में आती, सबका कब रास्ता कट जाता, जाने कब मंजिल दिख जाती, ओ मेरे बचपन के साथी! बायकाट किया, हड़ताल हुई, पड़ताल एक ही सवाल उठाती, उदंडी कोई, दंड सभी को, चुगली मुख पे, क्यों ना आती ? ओ मेरे बचपन के साथी! स्कॉलरशिप के पैसे मिलते, किसने किसकी फीस चुका दी, नई पोथी के टुकड़े करते, भोजन की हो जाती पाँती, ओ मेरे बचपन के साथी! जिम्मेदार हुए, घर बार छोड़कर, सारे साथी बिछुड़ गए, सेवानिवृत्त हो रही सभी अब, इतने दिन यूं ही पिछुड़ गए, जल्दी जल्दी दिन ढलते हैं, जल्दी जल्दी रातें जाती, ओ मेरे बचपन के साथी! ...
मैं बटर कहाँ से लाऊँ
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मैं बटर कहाँ से लाऊँ

डॉ. अवधेश कुमार "अवध" भानगढ़, गुवाहाटी, (असम) ******************** भूखे आकर, गाली खाकर। खून जलाकर, स्वेद बहाकर।। रोटी-भात जुटाऊँ। मैं बटर कहाँ से लाऊँ! दिनभर खटकर, पल-पल मरकर। विपदा सहकर, रोकर-हँसकर।। रूखा-सूखा खाऊँ। मैं बटर कहाँ से लाऊँ! सर की चाहत, दारू की लत। गंदी आदत, मिले न राहत।। कैसे उन्हें मनाऊँ? मैं बटर कहाँ से लाऊँ! टूटी पायल, चिथड़ा आँचल। मन भी घायल, महँगा ऑयल।। खाऊँ या कि लगाऊँ? मैं बटर कहाँ से लाऊँ! दिन को रातें, उल्टी बातें। नकली खाते, चालें-घातें।। देखूँ, चुप रह जाऊँ? मैं बटर कहाँ से लाऊँ! जा रे जा जा, सबका खा जा। सच, झुठला जा, बन जा राजा।। अवध न शीश झुकाऊँ। मैं बटर कहाँ से लाऊँ! परिचय :- डॉ. अवधेश कुमार "अवध" सम्प्रति : अभियंता व साहित्यकार निवासी : भानगढ़, गुवाहाटी, (असम) शपथ : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह र...
चाँद-चकोर
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चाँद-चकोर

संजय वर्मा "दॄष्टि" मनावर (धार) ******************** आकाश की आँखों में रातों का सूरमा सितारों की गलियों में गुजरते रहे मेहमां मचलते हुए चाँद को कैसे दिखाए कोई शमा छुप छुपकर जब चाँद हो रहा हो जवां। चकोर को डर भोर न हो जाएँ चमकता मेरा चाँद कहीं खो न जाए मन बेचैन आँखे पथरा सी जाएगी विरह मन की राहें रातें निहारती जाएगी। चकोर का यूँ बुदबुदाना चाँद को यूँ सुनाना ईद और पूनम पे बादलो में मत छुप जाना याद रखना बस इतना न तरसाओ मेरे चाँद तुम खुद मेरे पास चले आओ। परिचय :- संजय वर्मा "दॄष्टि" पिता :- श्री शांतीलालजी वर्मा जन्म तिथि :- २ मई १९६२ (उज्जैन) शिक्षा :- आय टी आय व्यवसाय :- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग) प्रकाशन :- देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ व समाचार पत्रों में निरंतर पत्र और रचनाओं का प्रकाशन, प्रकाशित काव्य कृति "दरवाजे पर दस्तक", खट्...
हम ही आज है, कल भी हम ही है…
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हम ही आज है, कल भी हम ही है…

कु. आरती सिरसाट बुरहानपुर (मध्यप्रदेश) ******************** हम ही आज है, कल भी हम ही है......! हम ही रीत है, रिवाज भी हम ही है......!! हम ही आजादी है, बेडियां भी हम ही है......! हम ही पंछी है, पिजरा भी हम ही है.....!! हम ही अभिमन्यु है, चक्रव्यूह भी हम ही है.....! हम ही मोहन है, बाँसुरी भी हम ही है.....!! हम ही पेड़ है, कुल्हाड़ी भी हम ही है......! हम ही नफ़रत है, प्रेम का प्रतीक भी हम ही है......!! हम ही तो आशा है, निराशा भी हम ही है......! हम ही तो पाप है, पून्य भी हम ही है......!! हम ही नदियों की कलकल है, अशुध्दियाँ भी हम ही है......! हम ही आस्तिक है, नास्तिक भी हम ही है......!! हम ही छल है, निच्छल भी हम ही है......! हम ही विध्या है, अनपढ़ भी हम ही है......!! हम ही धूप है, छाँव भी हम ही है......! हम ही शहर है, गाँव भी हम ही है......!! हम ही गीता है, कुरा...
दूध जलता क्यों है
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दूध जलता क्यों है

डॉ. किरन अवस्थी मिनियापोलिसम (अमेरिका) ******************** कभी-कभी दूध जल जाता है दूध जलता क्यों है दूध तो अमृत समान है, सभी खाद्यों में प्रधान है दूध विश्व का पालनहार है, दूध पर संदेह निराधार है दूध गर्भ में भी सभी को पालता है दूध सभी रोगों का उपचार है, फिर भी दूध कभी-कभी जल जाता है क्योंकि उसे मनुष्य का संपर्क मिल जाता है परिचय :- डॉ. किरन अवस्थी सम्प्रति : सेवा निवृत्त लेक्चरर निवासी : सिलिकॉन सिटी इंदौर (मध्य प्रदेश) वर्तमान निवासी : मिनियापोलिस, (अमेरिका) शिक्षा : एम.ए. अंग्रेजी, एम.ए. भाषाविज्ञान, पी.एच.डी. भाषाविज्ञान सर्टिफिकेट कोर्स : फ़्रेंच व गुजराती। पुनः मैं अपने देश को बहुत प्यार करती हूं तथा प्रायः देश भक्ति की कविताएं लिखती हूं जो कि समय की‌ मांग भी‌ है। आजकल देशभक्ति लुप्तप्राय हो गई है। इसके पुनर्जागरण के लिए प्रयत्नशील हूं। घोषणा पत्र : ...
बगावत भी जरूरी
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बगावत भी जरूरी

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** जो बैठा है खाली पेट, बगावत वहां से उठ सकता है, किसान, विद्वान, नादान, अंजान, बेजुबान, सताए स्त्री पुरूष इंसान, मदमस्त सत्ताईयों के सुख चैन लूट सकता है, हाँ मालूम है की सत्ता हमारी हलक से निवाला खींच सकता है, लम्पटों, महामूर्खों, अंधभक्तों की फसल को वाहियात बातों में उलझा सींच सकता है, मत भूलिए की जिसके सीने में वतन के लिए लगावट है, वहीं कर सकता बगावत है, बगावत का, विरोध का डर न हो तो सत्ताधारी बेलगाम, मदमस्त हो जाता है, उनके लिए हर गैरजरूरी काम जरूरी हो जाता है, पर ये नहीं सोचता कि अंदर ही अंदर बहती लावा ज्वालामुखी बन कभी भी फूट सकता है, आसमान की ओर निहारता, लिया बैठा सूखा खेत, बगावत वहां से उठ सकता है, इन नामुरादों की दुनिया लूट सकता है। परिचय :-  राजेन्द्र लाहिरी निवासी...
आदत से मज़बूर हूं
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आदत से मज़बूर हूं

किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया (महाराष्ट्र) ******************** प्रमोटेड हुआ हूं आदत से मज़बूर हूं बहुत छोटे पद से बड़े पद पर प्रमोटेड हुआ हूं भ्रष्टाचारी चाय पानी नहीं छोड़ा हूं कुर्सी पर बैठकर ग्राहक ढूंढता रहता हूं प्रमोटेड हुआ हूं आदत से मज़बूर हूं पूरा घरखर्चा इसी ऊपरी कमाई से निकालता हूं पगार को गुटका ठर्रा तंबाकू अय्याशी में उड़ाता हूं मिलीभगत तंत्र से काम चलाता हूं प्रमोटेड हुआ हूं आदत से मज़बूर हूं नए वर्ष में हितधारकों का काम किया हूं किसी को बताना मत घूसखोरी बहुत लिया हूं लगातार पंद्रह दिन न्यूईयर पार्टी ड्यू किया हूं प्रमोटेड हुआ हूं आदत से मज़बूर हूं अधीनस्थ कर्मचारियों पर रौब जमाता हूं धीरे से घूसखोरी की हिस्सेदारी मांगता हूं जो नहीं देता उसे ऑफिसबैठक ट्रांसफर करता हूं प्रमोटेड हुआ हूं आदत से मज़बूर हूं मैं जनता का नहीं जनता मेरी नौकर है सम...
अनुभव भरा खजाना
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अनुभव भरा खजाना

अंजनी कुमार चतुर्वेदी निवाड़ी (मध्य प्रदेश) ******************** हैं अनमोल धरोहर घर की, बूढ़ी दादी नानी। इनके पास छड़ी जादू की, दोनों बड़ी सयानी। नुस्खों का भंडार भरा है, अनुभव भरा खजाना। इनके पास दवा खाना है, नहीं वैद्य घर जाना। जीवन के अनुभव संग्रह कर, रखतीं दादी नानी। बतलातीं निरोग वो रहता, पियें गुनगुना पानी। सुबह शाम जो पैदल चलता, उसे रोग ना घेरे। वे धनवान सदा रहते हैं, जगते बड़े सवेरे। जिनको सूरज रोज जगाता, वे रोगी हो जाते। जो सूरज को स्वयं जगाते, रोग पास ना आते। जीवन जीना हमें सिखातीं, कौशल भी बतलातीं। कैसे रहे निरोगी काया, योगासन सिखलातीं। सारे घर को बाँध नेह से, हैं परिवार बनातीं। अगर रूठता कोई परिजन, जाकर उसे मनातीं। अनुशासन का पाठ पढ़ातीं, हैं सम्मान सिखातीं। कोई परिजन राह भटकता, उसको राह दिखातीं। सारे घर को एक बनाना, दादी ना...
नये….. साल में
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नये….. साल में

प्रीति शर्मा "असीम" सोलन हिमाचल प्रदेश ******************** नये साल में जिंदगी के नये तरीक़े इजाद कीजिए। दूसरों पर रखीं उम्मीदें समेट कर खुद पर उम्मीद कीजिए। नये साल में जिंदगी के नये तरीक़े इजाद कीजिए। एक-एक ग्यारह जरूर होते है। एक बनकर अपनी कीमत की पहचान कीजिए। गलत... गलत... गलत का। जब शोर मचा हो। मैं सही हूँ...... इस बात पर हमेशा गौर कीजिए। नये साल में जिंदगी के नये तरीक़े इजाद कीजिए। उम्मीदें जब टूटती हैं जिंदगी जब बिखरती हैं। उन सभी उम्मीदों को फिर से जोड़ने का काम कीजिए। नये साल में जिंदगी के नये तरीक़े इजाद कीजिए। आप...... जिंदा हो यह बात कबूल कीजिए। अपने टूटे हुए टुकड़ों से सपनों का नया ढांचा तैयार कीजिए। अकेले तुम ही लड़ोगे। राह में साथ कुछ पल ही मिलेंगे। जिंदगी की लड़ाई के लिए खुद को हिम्मत से तैयार कीजिए। हर साल नये साल आते रहेगें तुम...
नया साल नया दौर
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नया साल नया दौर

रूपेश कुमार चैनपुर (बिहार) ******************** जीवन के रंग मे खुशियों के संग में, सुबह की लाली घटा शाम की तन्हाई में, हरे भरे पेड़ों पर चिड़िया चहकती रहे, खेत खलिहानों मे फसल लहलहाती रहे, नई रोशनी मे नये जीवन की शुरुआत हो, सबको जीने की नई दिशा, नया राह मिले, गाँव मे खुशियों की नयी सौगात हो, सबको अपनी अभिव्यक्तियों का नया संसार मिले, मन मस्तिष्क मे नये दुनिया की स्वागत की आशायें हो, जीवन मे नये उद्देश्यों का लौ जले, प्रेम की ज्योति जले खुश्बुओं की महक उठे, विज्ञान , तकनीकी , साहित्य की ज्वाला और जले, दुनिया मे लोक कलाओं का चहुंदिश विकास हो, सभ्यता और संस्कृति को नया आयाम मिले, दुनिया मे आपस मे भाईचारे का संबंध हो, ना झगड़ा ना झंझठ का वास हो, पग -पग में दिल और प्यार का मिलन हो, जाति धर्म को मिटाकर सबकी धड़कनो की आवाज़ बनो, ऐसा नया हो नये साल क...
नव वर्ष सदा मंगलकारी हो
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नव वर्ष सदा मंगलकारी हो

सीमा तिवारी इन्दौर (मध्य प्रदेश) ******************** नव वर्ष सदा ही मंगलकारी हो। प्रकृति में हरा भरा उल्लास रहे। फूलों में भीनी भीनी सुवास रहे। फसलों में सोने सी उजास रहे। मौसम की बयार हितकारी हो। नव वर्ष सदा ही मंगलकारी हो। हर एक शरीर रोगों से मुक्त रहे। मन अच्छी आदतों से युक्त रहे। जीवन स्नेह प्रेम से संयुक्त रहे। दूर हर आपदा हर बीमारी हो। नव वर्ष सदा ही मंगलकारी हो। सद् ज्ञान विज्ञान का प्रचार रहे। संस्कृति संस्कारों का प्रसार रहे। अज्ञानता-अमानुषता पर प्रहार रहे। जीवन हर प्राणी का सुखकारी हो। नव वर्ष सदा ही मंगलकारी हो। हर मन में अपनत्व के भाव रहे। दूर सदा अंहकार ईर्ष्या दुर्भाव रहे। यशता सुखता के लिए समभाव रहे। हर एक जीवन ही शुभकारी हो। नव वर्ष सदा ही मंगलकारी हो। परिचय :- सीमा तिवारी शिक्षा : एम एस सी (गणित) और बी एड निवास : इन्दौर (मध्यप्रद...
नया सवेरा आने को है…
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नया सवेरा आने को है…

प्रमेशदीप मानिकपुरी भोथीडीह, धमतरी (छतीसगढ़) ******************** जनम मरण के बीच जो लकीर है जीवन तो पूर्व जन्म की ताबीर है लो बीत गया एक वर्ष, खट्टी-मीठी यादो संग जीवन मे बिखरते कुछ यादो और वादों संग कुछ जीवन से जो रीता है कुछ ने सपनो को जीता है जीना है हमें अब उन सपनो के संग-संग लो बीत गया एक वर्ष, खट्टी मीठी यादो संग जो बिता उसे भुला भी दो गम को सारे भूला भी दो वर्तमान को बेहतर कर, भर दो जीवन मे रंग लो बीत गया एक वर्ष, खट्टी मीठी यादो संग आना जाना जग मे जैसे कोई पहेली हो जन्म-मरण जैसे एक दूजे की सहेली हो मिला है जीवन, भरेंगे उसमे नित नव-नव रंग लो बीत गया एक वर्ष, खट्टी मीठी यादो संग नया सवेरा, नया उम्मीद आने को है अपने अपनों के साथ निभाने को है समय की दरकार है रहना अब अपनों के संग लो बीत गया एक वर्ष, खट्टी मीठी यादो संग जीवन मे बिखरते कुछ या...
नायिका के मुख से… नये साल में
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नायिका के मुख से… नये साल में

सरला मेहता इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** २१२ २१२ २१२ २१२ धुन... कर चले हम फ़िदा पान बीड़ा लगाया नये साल में होंठ पे भी रचाया नये साल में मतला चल दिए तुम कहाँ है मिलन की घड़ी लौट आना दुबारा नये साल में गिरह भूल शिकवे ज़लालत किया कुछ नया ज़िन्दगी को सँवारा नये साल में लाल चूड़ा सजे मेहँदी भी रची ब्याह में धूम बाजा नये साल में द्वार खोले सनम राह देखूँ तिरी फ़ोन भी है लगाया नये साल में चाँद को देख तू याद आया मुझे चाँदनी को बुलाया नये साल में देख तस्वीर तेरी हुई मैं फ़िदा मीत मुखड़ा दिखाना नये साल में थी घड़ी शायराना कि हम तुम मिले अब मुहब्बत जताना नये साल में चाहते हो अगर तो छुपाना नहीं हाथ हमसे मिलाना नये साल में परिचय : सरला मेहता निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित ...
नया साल
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नया साल

वीणा मुजुमदार इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** मैं क्यूं अलविदा कहूं बीते साल को वही कल नया साल दिखलायेगा लम्हा-लम्हा करके वक्त गुजरता जायेगा इक वक्त बाद बीता साल कहलायेगा। जो मेरे संग संग हैं उन्हें मुबारक नया साल जिन्हें खो दिया गत में रहेगा उनका मलाल। कुछ मिश्रित यादों भरा याद रहेगा गुजरा साल कुछ ने खींची टांगे और निकाली बाल की खाल। कुछ अनुभव तीखे मीठे थे कुछ थे खट्टे कड़वे नये वर्ष के नये अनुभव हों सारे मीठे मीठे। कुछ प्यारे पल मिले औ कुछ ग़म भरी यादें कुछ पलों ने किये नये साल में मिलने के वादे। गलती हुई हमसे ग़र कान पकड़कर माफ़ी दे दो कान न पकड़ेंगे हम दोबारा हमसे तुम वादा ले लो। इस ठंडे मौसम में चलो कुछ गर्मी लायें रिश्तों की गर्माहट में नया साल मनायें। परिचय : वीणा मुजुमदार निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करत...
अलविदा
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अलविदा

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** बीत गया जो, बीत गया वह, आगत का सत्कार करो। नूतन का करके अभिनंदन, जाते से भी प्यार करो।। कहीं तिमिर, तो कहीं उजाला, सूरज है तो रातें हैं। सुख,विलास है, तो बेहद ही, दुक्खों की बरसातें हैं जीवन फूलों का गुलदस्ता, हर पल को उपहार करो। नूतन का करके अभिनंदन, जाते से भी प्यार करो।। एक साल जो रहा साथ में, वह भी तो अपना ही था। हमने जो खुशहाली सोची, वह भी तो सपना ही था।। दुख, तकलीफें, व्यथा, वेदना, कांटों का संहार करो। नूतन का करके अभिनंदन, जाते से भी प्यार करो।। यही हक़ीक़त यही ज़िन्दगी, है बहार तो वीराना। कभी लगे मौसम अपना-सा, कभी यही है अंजाना।। आशाओं का दामन थामो, अवसादों पर वार करो। नूतन का करके अभिनंदन, जाते से भी प्यार करो।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मं...
महात्मा गांधी
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महात्मा गांधी

गगन खरे क्षितिज कोदरिया मंहू (मध्य प्रदेश) ******************** हे राम जीने की जीवनशैली को परिपूर्ण कर समाज राष्ट्र को नई दिशा देकर, राम जो ईष्ट है हम सबके अन्तर आत्मा से उनकी अंतिम सांसों से निकला, बापू महात्मा गांधी से अमर वाणी बनकर हे राम, हे राम, हे राम भारत की अन्तरात्मा में बस गए है। एकता, अखंडता, धर्मनिरपेक्षता सनातनधर्म की पहचान बनें इंसानियत को सर्वोपरि रखा चल पड़े सबको जोड़ने, जुड़ने स्वतंत्र भारत के लिए जनहित में, देशहित में, हिंसा के खिलाफ थे अंहिसा से जीत लिया भारत को प्रगतिशील भारत की नींव रखी इसलिए आज भी भारत की अन्तरात्मा में बस गए। मां का स्वरूप लिए उनका पूरा साथ दिया पत्नी ने सारथी बन अग्रणीय रही मां कस्तूरबा गांधी उन्हें कभी अपने पथ से विचलित नहीं होने दिया गगन मातृभूमि के लिए, स्वतंत्र भारत के लिए अपनी जिम्मेदारियों कभी पिछे नहीं ...
दर्प दलन
कविता

दर्प दलन

मालती खलतकर इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** भारत भू पर खिली ज्योत्सना बन यामिनी की रानी मंद-मंद पवन इतराती भारत मां की बन दासी। पाकर वीर जवान निराले वसुंधरा है मदमाती मस्ताने वीरों से सजी है भारत भाल की थाली। निकली यहां से वीरांगनाएं लेकर ढाल कटार गद्दारों को मार मार कर हुईं स्वयं निढ़ाल झुका नहीं पर मस्तक इनका बैरियो के दर्प में दर्प दलन कर दम लिया भारत मां के वीरों ने। राणा झांसी के चेतक उछले उछाल दिए भीम बनकर बैरियों के शस्त्र खोटे चंद्र, दास, रवि की रचना वितरित हुईविश्व विस्तार में गांधी, बोस, भगत सिंह का बलिदान अपार था संसार में। परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ ...
आओ संकल्प करें
कविता

आओ संकल्प करें

निरूपमा त्रिवेदी इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** अद्वितीय संस्कृति अनुपम नववर्ष वंदन अभिनंदन करें हम अतिहर्ष सहज प्रेम मानवता का हो उत्कर्ष घृणा-द्वेष दानवता का हो अपकर्ष मानव मानव का बने सच्चा मित्र नैतिक मूल्यों से महके सबका चरित्र खुशियों के घर-घर गूंजे मंगल गीत अपनों के अपनेपन भरी हो रिश्तो में प्रीत सेवा- सत्कार करें हम पूर्ण मनोयोग एक-दूजे संग हो सामंजस्य - सहयोग शुभ मंगल से हो नित- नित संयोग कर्मशील श्रमसाधक बन करें कर्मयोग दिनचर्या में सम्मिलित हो प्राणायाम योग स्वस्थ निरोगी काया हो सताए न कोई रोग परिष्कृत विचारों से भरा हो मन व्योम शुद्ध सात्विक आहार का हो उपयोग परिचय :- निरूपमा त्रिवेदी निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप ...
मना लेते है…
कविता

मना लेते है…

संजय जैन मुंबई (महाराष्ट्र) ******************** नजारा देखकर यहाँ का दिल रुकने को कहता है। फूलो के बाग में देखो भंवरा कुछ कहता है। तभी तो झूलते फूलों से महक बहुत आती है। जो मोहब्बत करने वालों को बहुत ही लूभाती है।। फूलों की किस्मत को देखो मोहब्बत हम करते है। पर देखो होठों का स्पर्श मिलता है इन फूलों को। तभी तो दिल में हमारे एक हलचल सी होती है। जो मोहब्बत का प्रतीक इन फूलों में दिखता है।। खिलते फूल डोलते भंवरे मोहब्बत को खोजते है। और मोहब्बत करने को फूलों के बाग चुनते है। बड़े ही किस्मत वाले है ये बगीचे के फूल देखो। मोहब्बत हम करते है पर श्रेय फूल ले जाते है।। फूलों की किस्मत का हम अंदाज लगा नहीं सकते। बहुत कोमल होकर भी कभी ये खिलने से नहीं रोकते। और अपना फर्ज निभाने से कभी भी पीछे नहीं हटते। इसलिए देकर फूलों को मना लेते है रूठों को।। ...
नूतन वर्ष मंगलमय हो
कविता

नूतन वर्ष मंगलमय हो

हरिदास बड़ोदे "हरिप्रेम" गंजबासौदा, विदिशा (मध्य प्रदेश) ******************** नूतन वर्ष मंगलमय हो, सारा जहां रोशन रहे। दिन दुनी रात चौगुनी हो, खुशियों की सौगात रहे। पुलकित मन सबका हो, ऐसा मन में विश्वास रहे। खुशियों भरा जीवन हो, भाईचारे का विस्तार रहे। इच्छाओं की पूर्ति हो, शतबुद्धि हमारे पास रहे। धन संपदा घर में हो, सुख समृद्धि का वास रहे। फूलों की तरह महक हो, गुलिस्तां का बागवान रहे। प्रेमभाव और समागम हो, सदा ईश्वर का वरदान रहे। मूलमंत्र है सहज जीवन हो, सद्द्विचारों का सम्मान रहे। नववर्ष की पावन बेला हो, अनुपम रिश्तों में सुधार रहे। परिचय :-  हरिदास बड़ोदे "हरिप्रेम" निवासी : गंजबासौदा, जिला- विदिशा (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविता...
नववर्ष का उपहार
कविता

नववर्ष का उपहार

अनुराधा प्रियदर्शिनी प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) ******************** कोहरे की चादर फैली थी जीवन में हो गया विहान सूरज आया चौबारे में आनन विहँसा कमल समान। हौले-हौले किरणें बिखरीं छँटी धुंध था स्वर्णिम काल उजला-उजला लगा दीखने रक्तिम पुष्प खिला ज्यों ताल। मादक सुगंध के प्रसरण से महक उठे गृह के कोने गौरीसुत ने आशीष दिया तन-मन के कष्ट लगे खोने। पुष्पमाल गज कण्ठ विलग ज्यों गिरे धरा पर अभयदान ऐसे ही तन-मन शून्य हुआ मिल गया तोष जीवन समान। अरुण अरुणिमा तन पर धारे गोदी में था अति प्रिय लाल मैं नेत्रांभूषित वात्सल्य भरे निरख रही ज्यों विजय माल। उपहार भरा मेरा जीवन तू वत्स! प्रफुल्लित पुष्पित हो आशीष मातृ का तुझको है सूरज-सा हर पल गौरव हो। परिचय :- अनुराधा प्रियदर्शिनी निवासी : प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुर...
नववर्ष
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नववर्ष

रेखा कापसे "होशंगाबादी" होशंगाबाद (मध्य प्रदेश) ******************** दो हजार बाईस के, कुछ ही दिन है शेष। आया है नववर्ष यह, ले पावन अनिमेष।। (१) शुचि संदल नववर्ष है, दो हजार बाईस। खुशियों की दस्तक रहे, प्रति घंटे चौबीस।। (२) अंतस से शुभकामना, जनमानस मन भाव। आगंतुक नव वर्ष में, संचित प्रीति लगाव।। (३) स्वागत करते है सभी, आनन खिलता हर्ष। मनुज भाव नववर्ष में, हृदय रुचिर उत्कर्ष।। (४) पथ कंटक सब दूर हो, हटे तमस का जाल। संदल शुचि नववर्ष में, खुशियाँ मालामाल।। (५) आया है नव वर्ष शुभ, हर्षित मन के तार। संकल्पित मन भावना, जनहित मन आधार।। (६) सत्य नेक शुचि हो डगर, राग द्वेष छल त्याग। रिश्तों की मनुहार ले, हृदय रहें अनुराग।। (७) शिथिल उदर की तृप्तता, जन मानस की चाह। तन पर सबके हो वसन, आलय अन्न अथाह।। (८) प्रण कर नूतन वर्ष में, अधर मृदुल हो बोल। करुणा दया निदा...
बसंत बहार
कविता

बसंत बहार

अशोक कुमार यादव मुंगेली (छत्तीसगढ़) ******************** वसुंधरा में फिर से नव बहार आ गयी है। जन जीवन में नवीन खुशियां छा गयी है।। शिशिर ऋतु में हरित धरती वीरान थी। जीर्ण-शीर्ण तरुओं से दुनिया मसान थी।। बूढ़े पत्ते और फूलों का दर्द कौन समझे? प्रकृति के प्राणी पुनर्जन्म चक्र में उलझे।। हवाएं गीत गाती, लहराती, नाच रही है। अपनी प्रेम और वेदना को भांप रही है।। अमृतफल के डालियों में कोयल कुहूकी। पुष्प पल्लव के खुशबू से वादियां महकी।। हर्षित प्राणीजन कर रहे उत्सव की तैयारी। पंख फैलाकर उड़ रही है तितलियां प्यारी।। प्रणय की धुन बजा रहे हैं मतवाले मधुकर। हवा में नाच रही है कलियां झूम-झूम कर।। हरित आभा को देखकर चकित है संसार। देखो चहूंओर फैली है खुशियों का अंबार।। करो सहृदय कविराज बसंत का गुणगान। भरलो मन में भव्य कल्पनाओं की उड़ान।। उल्लासित हो स्वागत करो बसं...
नमन नववर्ष का
कविता

नमन नववर्ष का

सीमा रंगा "इन्द्रा" जींद (हरियाणा) ******************** आओ! करें नमन नववर्ष का भूल पुरानी यादों के समंदर को मना ले नवल का त्यौहार मिलझूल झूमे गीत गाए। भूले दुःख-दर्द बीते वर्ष के माफ करे दिए कष्ट जिन्होंने इस नववर्ष की बेला पर बना लेते हैं शत्रु को भी मित्र। चलेंगे संग में पुराने सखा भुला देंगे दुःख भरी यादों को अपनों का आशीर्वाद साथ में नववर्ष को लगा लो गले। शीत-ऋतु की ठंड में करें आगाज मन के मतवाले बन छा जा जग में एक-दूजे का साथ निभा ले दोस्ती आलस त्याग संघर्ष को लगाओ गले। परिचय :-  सीमा रंगा "इन्द्रा" निवासी :  जींद (हरियाणा) विशेष : लेखिका कवयित्री व समाजसेविका, कोरोना काल में कविताओं के माध्यम से लोगों टीकाकरण के लिए, बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ हेतु प्रचार, रक्तदान शिविर में भाग लिया। उपलब्धियां : गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से प्रशंसा पत्र, दैनिक भास्...