प्रेम विवाह
किरण पोरवाल
सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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आदर्श और संस्कारों की
धज्जियां तुम नहीं उड़ाओ बेटी,
नहीं तो अपने जिस्म के ३५ टुकड़े,
शौक से तुम करवाओ बेटी।
तुम क्यों भरोसा करती हो,
इन छँलियों और मक्कारो पर,
वेश बदलकर आता है
रावण सीता को छलने को।
मां-बाप की आत्मा को,
जब भी तुम दुखाओगी।
औलाद कभी सफल नहीं होगी
जग में प्रेम विवाहो से।
आधुनिकता की चमक में
खो गया है इंसान,
मर्यादा और आचरण
खूंटी पर दीया टांग।
फिल्मों की है बेशर्मी से
बिगड़ा है इंसान,
हीरो-हीरोइन अच्छे लगे
क्या आचरण और व्यवहार।
माना फैसला आपका,
पर चूक न जाए सावधान?
जीवन जब धिक्कारता
यह गुंडे और बदमाश,
नारी तू नारायणी
तू है हीरे की खान,
जौहरी ही पहचानता,
हीरे का हे दाम
संस्कार और संस्कृति
नई पीढ़ी के लिए अनमोल,
इसको तुम मिटाओगे तो
आगे की पीढ़ी,
क्या जानेगी मोल।
परिचय ...




















