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रंग रसिया
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रंग रसिया

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** होली खेलने बरसाना श्याम आया ग्वाल बालों की टोली संग लाया। प्रेम रसिया सब के मन को भाया राधा रानी को देख मन मे हर्षाया। होली….. सम दृष्टि है वो, कर्ता श्रृष्टि भी वो सारे रुपों मे है उसकी ही माया। भक्ति रस मे भाव विभोर भक्तों को अपने स्वरुप का दर्शन कराया। होली….. रगों का ग़ुबार बन छाया गगन मे केशरिया रंग श्याम के मन भाया। होली के रुप मे प्रेम की वर्षा कर रंग रसिया जगत मे वो कहलाया। होली….. परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक : १४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी. निवासी : उज्जैन (मध्य प्रदेश) रुचि : आपकी बचपन में व्यायाम शाला में व्यायाम, क्षिप्रा नदी में तैराकी और शिक्षा अध्ययन के साथ कविता, गीत, नाटक लेखन मंचन आदि में गहन रूचि रही है। व्यवसाय सेवा : आप सार्वजनिक स्वास्थ्य वि...
मेरे आराध्य
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मेरे आराध्य

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** मेरे आराध्य देते भाव, तो मैं गीत लिखता हूं। श्रेष्ठ गायक सकें गा, इसलिए संगीत लिखता हूं। मेरे आराध्य ... करी आराध्य ने करुणा कृपा, तो राम मन भाए। लिखाई राम महिमा, जिसको गायक झूमकर गाये। न मैं कवि हूं न हूं गायक, समर्पण व्यक्त करता हूं। मेरे आराध्य ... तुम्ही ने प्रेरणा करके, नाम मधुशाला लिखवाई। जिसे संगीत और स्वर दे, विवेक और रोली ने गाई। सुनाते नाम महिमा तुम, कलम को मैं चलाता हूं। मेरे आराध्य ... लिखाते गीत मीटर में, तो गायक डूबकर गाते। जो गाते डूबकर भक्ति में, वो तेरी कृपा पाते। करी इतनी कृपा जिसका मै, हरपल गान करता हूं। मेरे आराध्य ... मेरे आराध्य तुमसे ये ही, विनती दास की तेरे। रमू बस नाम सेवा में, न अब माया मुझे घेरे। जो दी है नाम की सेवा, उसे निष्ठा से करता हूं। मेरे आराध्य ... ...
गंगा मैया ने सुनली पुकार
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गंगा मैया ने सुनली पुकार

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** गंगा मैया ने सुन ली पुकार, बुलावा भेज दिया। देखी बच्चे की तड़प अपार, बड़ा उपकार किया। गंगा मैया ने सुन ली ... माघ मेला सजाती है मैया मेरी, अपने बच्चों को बाहों में लेने के मित। जो समझ पाते है अपनी मां की तड़प, वो लगाते हैं डुबकी तो उनका है हित। मां ने आंचल में अपने बुला बच्चो को, उन पर अपना दुलार बहा है दिया। गंगा मैया ने सुन ली ... निकली गौमुख से, और जाके सागर मिली। निकली जिस तीर्थ से, उसकी महिमा बढ़ी। जहां निकली और बच्चे मिलन आए तो, उनपे अपनी कृपा बरसा है दिया। गंगा मैया ने सुन ली ... मैने हरद्वार में मां को पाया बहुत, भाव आया कि भक्तों को लेकर चलूं। वृद्धों की सेवा का फल मिलेगा मुझे साथ जाने वाला धन कमाता चलूं। मेरे आराध्य ने सात्विक भाव को, देके साहस सदा ही है पूरा किया। गंगा मैया ने सुन ली...
नया सृजन
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नया सृजन

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** राम जी कृपा से मिला है ये तन, नाम सुमिरन में इसको लगा दीजिए। जग के कार्यों के संग नाम जपते हुए, अपनी आत्मा को निर्मल बना लीजिए। राम जी की ... प्रभु ने दी श्रेष्ठ योनी है मुक्ति के मित, तू भी करले जतन, इसमें ही तेरा हित। प्रभु की किरपा को सार्थक बनाने के मित, नाम सुमिरन में मन को रमा लीजिए। राम जी की... तेरे पूर्व सत्कर्मों का फल है ये तन, इसका उद्देश्य पूर्ति का साधन तू बन। नहीं मालूम फिर अवसर मिले ना मिले, राम सांसों में अपनी बसा लीजिए। राम जी कृपा... तेरे सत्कर्म पितरों को भी भाएंगे, तुझको अन्तर का आशीष दे जाएंगे। तुझको पितरों के ऋण से मुक्ति पाना तो, नाम सुमिरन और लेखन में रम जाइए। राम जी की कृपा... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ...
क्षणभंगुर और नश्वर तन को
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क्षणभंगुर और नश्वर तन को

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** क्षणभंगुर इस नश्वर तन, को केवल ईश्वर चला रहा है। तुझको सिमरन का अवसर दे निज चरणों में बुला रहा है। क्षणभंगुर और नश्वर तन को .... ईश्वर की करुणा कृपा का पूरा लाभ उठा ले बंदे। प्रभु नाम सुमिरन हीं काटे कटेगा, तेरे माया के फंदे। तेरा पिता बाहें फैलाए तेरी और निहार रहा है। क्षणभंगुर इस नश्वर तन को .... जन्म मरण से मुक्ति हेतु, तुझको श्रेष्ठ योनि में भेजा। निज स्वामी की सेवा देकर उसने तेरा भाग्य सहेजा। तेरा यशवर्धन के मित वो प्रभु महिमा को लिखा रहा है। क्षणभंगुर और जो दायित्व दिए हैं तुझको उसने ही पूरे करवाए, राम नाम लिखता लिखवाता ये सत्कार उसे है भाए। तुझसे प्रभु महिमा लिखवा कर, शत भक्तों से गवा रहा है। क्षणभंगुर और .... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह...
मेरे सिया के श्रीराम
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मेरे सिया के श्रीराम

प्रतिभा दुबे "आशी" ग्वालियर (मध्य प्रदेश) ******************** मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, मेरे सिया के श्रीराम। उनके चरित्र चित्रण से सीखे, मर्यादा ये संसार।। मोहिनी मूरत मेरे श्रीराम की, दर्शन मिले अपार। पुलकित हो उठे मन मेरा, जब भी लूं राम का नाम।। नहीं भेद करते कभी प्रभु, भावनाओं के साथ। झूठे बेर सबरी के, प्रेम से खाते हैं मेरे श्रीराम।। केवट की नौका को भी, किया प्रभु ने प्रणाम। हाथ जोड़ के केवट को, दिया भवसागर से तार।। आज्ञा से पिता दशरथ की, गए प्रभु वनवास। ऋषि मुनि की सेवा कर, किया है प्रभु ने प्रवास।। रावण पर उपकार किया, करके युद्ध अपार। तरस रहा था मुक्ति को, श्रीलंका का सम्राट।। आजीवन की साधना, लेकर शिव शंकर का नाम। राम का रूप आनंद है, चरणों में जिनके चारों धाम।। सूर्य देव आराध्य हैं, कुल दीपक हैं जिनके श्रीराम। वनवासी कहो या घट घट वासी...
मुरलीधर
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मुरलीधर

रतन खंगारोत कलवार रोड झोटवाड़ा (राजस्थान) ******************** मन बसिया, रंग रसिया गोपाल, तुझे छलिया कहूं या कहूं नंदलाल। हजारों नाम और असंख्य है अवतार, मधुर तेरी मुरली की हैं, तान ओ मुरलीधर।। गोकुलवासियों ने कोई पुण्य कमाया, जो मुरलीधर उनका सखा बन आया। सुख-दुःख का साथी बना नंदलाला, त्रिलोकी का नाथ बन गया रखवाला।। हंसी ठिठोली से चले जीवन की नैया, तारणहार ही बन गया सबका खवैया। सब ग्रामवासियों को बहुत प्रेम से समझाया, पर्वत की पूजा का जीवन में महत्व बताया।। पूजा टली इंद्र की तो, उसका क्रोध जगा, सात दिनों तक वर्षा का सैलाब लगा। त्राहि त्राहि मच गया जब चहूं ओर, तब हरी हर आये सुन दिन हीन पुकार।। गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाया, सब जीवों को उसके नीचे बसाया। मुरली की मधुर तान सुन सब भूल गए दुख और काज, तब से ही गिरधर बन गए गोवर्धन महाराज।। परिचय : रतन ...
राम
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राम

विजय वर्धन भागलपुर (बिहार) ******************** जिनके होठों पर हों राम उनका जीवन सुधा समान उनका दिल कलुषित नहीं होता करते वे सबका कल्याण जिनके हिय में वसते राम उनका सब होता है काम जो भजते हैं राम का नाम उनका जीवन स्वर्ग समान वे करुणा के होते गागर जैसे राम दया के सागर जो अनुचार हैं रामचंद्र के वे होते हनुमान समान परिचय :-  विजय वर्धन पिता जी : स्व. हरिनंदन प्रसाद माता जी : स्व. सरोजिनी देवी निवासी : लहेरी टोला भागलपुर (बिहार) शिक्षा : एम.एससी.बी.एड. सम्प्रति : एस. बी. आई. से अवकाश प्राप्त प्रकाशन : मेरा भारत कहाँ खो गया (कविता संग्रह), विभिन्न पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।...
नगर-नगर में धूम मची है
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नगर-नगर में धूम मची है

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** नगर-नगर में धूम मची है राम जी के नाम की। प्राण प्रतिष्ठा हो गई है पुरुषोत्तम श्रीराम की। नगर-नगर में ... मंगलाचरण से पावन हो गई धरती अयोध्या धाम की। घर आँगन में दीप जले हैं स्वागत में श्रीराम की। नगर-नगर में ... चारों ओर चर्चा है अब दीपोत्सव कीर्तिमान की। देख रहीं है दुनिया शक्ति अब भारत माता के नाम की। नगर-नगर में ... पूरी हो गई अभिलाषा अब भक्तों के बलिदान की। लहर चली है देखो अब सनातन के सम्मान की। नगर-नगर में ... अजर अमर गाथा है ये श्रीराम के नाम की। जय हो राम लक्षमण जानकी जय हो महावीर हनुमान की। नगर-नगर में ... परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी. निवासी : उज्जैन (मध्य प्रदेश) रुचि : आपकी बचपन में व्यायाम शाला में व्यायाम,...
सब शौक हुए पूरे
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सब शौक हुए पूरे

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** , अब सांसों को जीना है। अमृत ज्ञान दे रहा ईश्वर, अब बस उसको ही पीना है। सब शौक........ दी हमको श्रेष्ठ योनि, उपकार है प्रभु का। परिवार दिया उत्तम, ये प्यार है प्रभु का। दायित्व जो भी देता, पूरे वही कराता। जैसे भी प्रभु रक्खे, वैसे हमें जीना है। सब शौक........ सृष्टि का वो सृजन कर रहा, ये है कार्य प्रभु का। सृष्टि को पोषण भी, एक कार्य है प्रभु का। गिनती की मिली सांसे, निश्चित है ये रुकेंगी। जो भी बची हैं उनको, सुमिरन में लगाना है। सब शौक............ मानव की योनि ईश्वर, मुक्ति के हेतु देता। बुद्धि विवेक देकर, वो श्रेष्ठ बना देता। प्रभु नाम में ही रमकर, मुक्ति हमें पाना है। सब शौक.......... परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा निवास : जानकीपुरम (लखनऊ) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि म...
देवों के महादेव
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देवों के महादेव

डॉ. राम रतन श्रीवास बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ******************** शिव की भक्ति शिव की शक्ति, सावन का मास जो आया.....। देवों के महादेव को भक्तों ने बुलाया ...।। प्रथम वंदना गौरी नंदन, त्रिविध ताप हर पुष्प चढ़ाया....। देवों के महादेव को भक्तो ने बुलाया ...।। शिश जटा प्रभु चंद्र विराजे, हे भोलेनाथ भंडारी..... । देवों के महादेव को भक्तो ने बुलाया ...।। त्रिपुंड़ धारी गले शेष विराजे, त्रिशूल बाघांबर सोहै..... । देवों के महादेव को भक्तों ने बुलाया ...।। भक्तों पर सहज कृपा जो करते, आशुतोष कहलता .....। देवों के महादेव को भक्तों ने बुलाया ...।। "राधे" की विनती सुन लो हर, भक्तों की कष्ट मिटाओ हर हर.... । देवों के महादेव को भक्तों ने बुलाया ...।। ┈┉═❀❀═┉┈ परिचय :-  डॉ. राम रतन श्रीवास निवासी : बिलासपुर (छत्तीसगढ़) साहित्य क्षेत्र : कन्नौजिया श्रीवास समाज साहित्यिक मंच छत...
आयीं माँ दुर्गे हमारे द्वार
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आयीं माँ दुर्गे हमारे द्वार

डॉ. कोशी सिन्हा अलीगंज (लखनऊ) ******************** डोली पे होके माँ सवार आयीं माँ दुर्गा हमारे द्वार धूप दीप और नैवेद्य चढाऊँ पावन पूत कलश बिठाऊँ आरती उतारूँ मैं बारम्बार आयीं माँ दुर्गा हमारे द्वार स्वागत में माँ के गीत गाऊँ धुन पे गरबा नाच नचाऊँ झमक झूमूँ होके मैं तैयार आयीं माँ दुर्गा हमारे द्वार दु:ख हरण हित तू माँ आयीं दुष्ट दलन हित पाँव बढ़ायी पहनाऊँ तुझे मैं विजयी हार आयीं माँ दुर्गा हमारे द्वार। परिचय :- डॉ. कोशी सिन्हा पूरा नाम : डॉ. कौशलेश कुमारी सिन्हा निवासी : अलीगंज लखनऊ शिक्षा : एम.ए.,पी एच डी, बी.एड., स्नातक कक्षा और उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापन साहित्य सेवा : दूरदर्शन एवं आकाशवाणी में काव्य पाठ, विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में गद्य, पद्य विधा में लेखन, प्रकाशित पुस्तक : "अस्माकं संस्कृति," (संस्कृत भाषा में) सम्मान : नव सृजन संस्था द्वारा ...
तुम्हारी सदा हो जय जयकार
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तुम्हारी सदा हो जय जयकार

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** अम्बे, जगदंबे, जग जननी तुम जग की हो पालनहार। तुम्हारी सदा हो जय जयकार … जय माँ लक्ष्मी, सरस्वती तुम सब के जीवन का आधार। तुम्हारी सदा हो जय जयकार … नौ रुपों की महारानी हो तुम तुम्हारी महिमा अपरंपार। बड़े बड़े असुरों का तुमने कर दिया संहार। तुम्हारी सदा हो जय जयकार … नौ तत्वों की रचना तुम्हारी सुन्दर ये संसार। जलचर, थलचर, नभचर सब मे तुम्हारी शक्ति का संचार। तुम्हारी सदा हो जय जयकार … नौ रात्रि सा प्यारा न जग मे दूजा है त्योहार। भक्ति रस मे डूबे जग सारा ख़ुशियाँ मिले अपार। तुम्हारी सदा हो जय जयकार … जगमग दीप जलाएँ सब बाँधें बंदनवार। मंगल गीत तुम्हारे गाएँ माँ आओ हमारे द्वार। तुम्हारी सदा हो जय जयकार … जय महा काली, शेरावाली सब पर करो उपकार। अपने भक्तों को दर्शन दे दो माँ सुनलो सब की पुकार। त...
तू है जगत पिता
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तू है जगत पिता

प्रेम नारायण मेहरोत्रा जानकीपुरम (लखनऊ) ******************** तू है जगत पिता तो मैं भी तेरा ही वंशज हूं। तूने करुणा बरसाई तो जीवों में अग्रज हूं। तू है जगत पिता तो मैं भी तेरा ही वंशज हूं। मैं संसारी जग में आया जगमाया में डूबा, मैं मेरा में सीमित रहकर जीवन से था ऊबा। तेरी सेवा जब पाई थोड़ी जीवन में रस आया, सुमिरन का जब जाम पिया तो जग का कुछ ना भाया। तेरे सृजन के रस में डूबा भंवरा हूं, पंकज हूं। तू है जगत पिता तो मैं भी तेरा ही वंशज हूं। तेरी कथा सुनना-सुनवाना ही अब मुझको भाता, तेरा नाम जपता, जपवाता इसमें ही दिन जाता। जितनी सांसे हो खाते में निज सेवा में रखना, तेरे नाम से तृप्त आत्मा अब जग का क्या चखना। राह का एक कंकड़ था, अब तेरे चरणों की रज हूं। तू है जगत पिता तो मैं भी तेरा ही वंशज हूं। तेरे भक्त गाली भी दे तो तेरा प्रसाद ही समझूं , मान और अपमान ...
गणपति बप्पा : ज्ञान के दाता
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गणपति बप्पा : ज्ञान के दाता

राकेश कुमार दास पिपिलि, पुरी ******************** हे विघ्नहर्ता गणपति बाप्पा, हर शुभारंभ के आधार। तेरे बिना यह जग सूना है, तू ही है ज्ञान का भंडार॥ विद्यालय से मंदिर तक, तेरा ही गुणगान। तेरे नाम से खिलते हैं, विद्या के उद्यान॥ शिवपुत्र! जब शीश गंवाया, फिर भी दिखाया ज्ञान का प्रकाश। तेरे आशीष से जग ने पाया, विद्या का अनमोल विश्वास॥ शिक्षा से जीवन होता है उज्जवल, अज्ञान से होता पतन। तेरी कृपा से मिटते अंधेरे, ज्ञान बनता जीवन धन॥ ना कोई वंचित शिक्षा से हो, सबको मिले तेरा आशीर्वाद। तेरी शरण जो आए गणपति, उसका जीवन हो सफल और आबाद॥ तेरी मूर्ति में है आस्था, तेरे चरणों में है विश्वास। गणपति बाप्पा मोरया... मंगल मूर्ति मोरया...॥ परिचय : राकेश कुमार दास निवासी : पिपिलि, पुरी घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है। ...
हे गणपति
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हे गणपति

प्रीतम कुमार साहू 'गुरुजी' लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** छत्तीसगढ़ी रिद्धी-सिद्धि के तै स्वामी, तोरेच गुन ल गावत हँव। सजे सिहासन आके बइठो, पँवरी म माथ नवावंत हँव।। हे गणपति, गणनायक स्वामी, महिमा तोर बड़ भारी हे। माथ म मोर मुकुट सजत हे, मुसवा तोर सवारी हे।। साँझा बिहिनिया करँव आरती, लडवन भोग लगावंत हँव। सजे सिहासन आके बइठो, पँवरी म माथ नवावंत हँव।। माता हवय तोर पारबती अउ पिता हवय बम भोला। दिन दुखियन के लाज रखौ, बिनती करत हँव तोला।। पान-फूल अउ नरियर भेला, मै हर तोला चघावंत हँव। सजे सिहासन आके बइठो, पँवरी म माथ नवावंत हँव।। अंधरा ल अखीयन देथस अउ बाँझन ल पुत देवइयाँ। बल,बुद्धी के तै हर दाता, सबके बिगड़े काम बनइयाँ।। हे गणराज, गजानंद स्वामी मै हर तोला मनावंत हव। सजे सिहासन आके बइठो, पँवरी म माथ नवावंत हँव।। परिचय :- प्री...
गजानंद स्वामी
आंचलिक बोली, भजन

गजानंद स्वामी

प्रीतम कुमार साहू लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** छत्तीसगढ़ी रिद्धी सिद्धि के तै स्वामी, तोरेच गुन ल गावत हँव ! सजे सिहासन आके बइठो,पँवरी म माथ नवावंत हँव !! हे गणपति, गणनायक स्वामी, महिमा तोर बड़ भारी हे ! माथ म मोर मुकुट सजत हे, मुसवा तोर सवारी हे !! साँझा बिहिनिया करँव आरती, लडवन भोग लगावंत हँव ! सजे सिहासन आके बइठो, पँवरी म माथ नवावंत हँव !! माता हवय तोर पारबती अउ पिता हवय बम भोला ! दिन दुखियन के लाज रखौ, बिनती करत हँव तोला !! पान-फूल अउ नरियर भेला, मै हर तोला चघावंत हँव ! सजे सिहासन आके बइठो, पँवरी म माथ नवावंत हँव !! अंधरा ल अखीयन देथस अउ बाँझन ल पुत देवइयाँ बल,बुद्धी के तै हर दाता, सबके बिगड़े काम बनइयाँ !! हे गणराज, गजानंद स्वामी मै हर तोला मनावंत हव ! सजे सिहासन आके बइठो, पँवरी म माथ नवावंत हँव !! परिचय :- प्रीतम कुमार साह...
श्री विघ्न हर्ता गणेश
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श्री विघ्न हर्ता गणेश

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** गणपति मंगल दायक हो तुम, सब के विघ्न हरो। शरणागत है शरण तुम्हारी, जीवन सुलभ करो। गणपति मंगल…. दीनबंधु, दीनानाथ, दयानिधी सब पर दया करो। सिध्द विनायक, जन गण नायक चिन्ता हरण करो। अनन्त भुवन के अधिपति हो तुम, मंछा पूरण करो। देकर वांछित फल सब को, मन हर्षित करो। गणपति मंगल… निर्मल मन हो, कपट न छल हो, भावना ऐसी भरो। मधुर हो वाणी, हस्त हो दानी, सक्षम ऐसा करो। राग द्वेष, मद निकट न आवे ऐसी दृष्टि करो। जन जन हो सुखी धरा पर, ऐसी वृष्टि करो। गणपति मंगल…. परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी. निवासी : उज्जैन (मध्य प्रदेश) रुचि : आपकी बचपन में व्यायाम शाला में व्यायाम, क्षिप्रा नदी में तैराकी और शिक्षा अध्ययन के साथ कविता, गीत, नाटक लेखन मंचन आदि म...
श्री गणेश जी की आरती
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श्री गणेश जी की आरती

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** आरती गणपति गौरी सुतम्। सर्व मगंलकारी है गजमुखम्। आरती गणपति… सर्व लोक कल्यानार्थ अवतरितम्। सर्व सिद्ध विनायक विघ्न हरणम्। आरती गणपति… सर्व देव वरद, हो प्रथम पुजितम्। सर्व दिव्य कलाओं मे हो परिपूर्णम् आरती गणपति… सर्व शक्ति स्वरूप है सिद्धेश्वरम्। सर्व माया अधिपति विश्वेश्वरम्। आरती गणपति… सर्व बाधा हरे गणेश आयुधम्। सर्व मूषक, पाश, भुजंग, अंकुशम्। आरती गणपति… सर्व मधुर, मनोरम ये छबी अनुपम। सर्व देवों मे देव ,तुम आशुतोषम्। आरती गणपति… सर्व दुर्दिन, दुविधा, दुःख हरणम्। गण नायक, गजानन, गज कर्णम्। आरती गणपति... सर्व विद्यावन, गुणी, अति चतुरम्। सर्व आनन्द दायक है चतुर भुजम्। आरती गणपति… सर्व काज सँवारे शशीवरनम्। आए जो गजानन की शरणम्। परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिना...
कृष्ण से गुहार
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कृष्ण से गुहार

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** हे कृष्ण पुकारे जब-जब, देना हमें सहारा। हम है बालक तुम्हारे, तुम ही हो पालनहारा। हे कृष्ण पुकारे …. आया जो इस धरा पर, सब मे है अंश तुम्हारा। देखें जिधर भी हम, लगता है सब कुछ न्यारा। मन मोहक इस छबि मे, दिखता है रुप तुम्हारा। संरचना ये तुम्हारी, इस सृष्टि को नमन हमारा। हे कृष्ण पुकारे …. कर्म करें निष्काम भाव से, ये है कथन तुम्हारा। जैसे कर्म करेंगे, होगा वैसा भाग्य हमारा। देना इतनी शक्ति, गुनाहों से करें किनारा। जाये उधर ना हम कभी, जहां हो अहित हमारा। हे कृष्ण पुकारे …. जब जब सजल नयन से, भक्तों ने तुम्हें निहारा। लेकर शरण में अपनी, कष्टों से उसे उबारा। हाथों मे है तुम्हारे, ये जीवन का चक्र सारा। रखना सानिध्य मे अपनी, हो जब जब जनम दुबारा। हे कृष्ण पुकारे …. परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मो...
बाबा महाकाल
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बाबा महाकाल

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** बम भोला बम भोला कालों के काल। डम् डम् डमरू वाले मृत्युंजय महाकाल। बम भोला… जटा में गंग धारा है शशि धरे है भाल। ग्रीवा में भुजंग संग रुद्राक्ष की माल। बम भोला… कंठ में हलाहल है त्रिलोचन में ज्वाल। भस्म रमैया भूतेश्वर के अंग वस्त्र है खाल। बम भोला… त्रिशूल अंकुश बाबा का तीन लोग की चाल। तीनों लोक अधीन है पृथ्वी, नभ, पाताल। बम भोला… स्वयं सिद्ध, स्वयंभू है सिद्धेश्वर महाकाल। समाधि में लीन रहते हैं बाबा सालो साल। बम भोला… साक्षात् शिव रुप है ज्योतिर्लिंग महाकाल। छबि अर्द्धनारीश्वर की लगे बेमिसाल। बम भोला… भोले शम्भु भोलेनाथ भोलेश्वर महाकाल। शरण में तेरी आए बाबा अब तू ही सम्भाल। बम भोला… परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल...
महादेवा
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महादेवा

प्रीतम कुमार साहू लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** छत्तीसगढ़ी भाषा में भजन काल के महाकाल कहावय, शिव शंकर महादेवा भक्तनमन के भाग जागे जेन करे तोर सेवा। अंग म राख, भभूत चुपरे बईला म करें सवारी भूत, प्रेत अउ मरी मसान जम्मों तोर संगवारी।I दानी नइ हे तोर असन कस हे सम्भू त्रिपुरारी कतका तोर जस ल गावँव महिमा हे बड़भारी।I गंगा हर तोर जटा म साधे, कहाय तै जटाधारी बघुवा के तै खाल पहिरे जय हो डमरूधारी।I गणेश, कार्तिक तोर लाल कहावय पार्वती सुवारी तोर पउँरी म माथ नवावँय जम्मो नर, नारी।I असुर मन कतकोंन छलिस तोला सिधवा जान हलाहल के पान करइय्या नीलकंठ भगवान।I परिचय :- प्रीतम कुमार साहू (शिक्षक) निवासी : ग्राम-लिमतरा, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़)। घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। ...
नन्द यशोदा धाम
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नन्द यशोदा धाम

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** चल रे मनवा तीरथ करने नन्द यशोदा के धाम। जहां बिराजे जगत के पालक श्री कृष्ण, बलराम। चल रे मनवा … नयन को सुख और चैन मिलेगा ह्रदय बसेंगे श्याम। लीला धर की लीला भूमि करने उसे प्रणाम। चल रे मनवा … शरणागत को शरण मे लेकर सद् गति देना काम। सर्वेश्वर उद्धारक सबके तारण हार है नाम। चल रे मनवा … यमुना जी पटरानी तीरे बसा है गोकुल गाम। पुष्टि पंथ के जनक प्रभु जी करें यहाँ विश्राम। चल रे मनवा … बृज भूमि चौरासी कोस है प्रेम रतन की खान। राधा जी संग रास रचाते हैं कृपा सिन्धु भगवान। चल रे मनवा … चरण धूलि अनुरागी भक्त जन करें सुधा रस पान। कुंड कुंड है मानसरोवर यही इस की पहचान। चल रे मनवा … वृन्दावन की वसुंधरा मे प्रकट है गऊ लोक मान। आत्म तृप्ति अभिलाषी ज्ञानी करते यहाँ पे मुक़ाम। चल रे मनवा … परिचय ...
बोलो जय महाकाल …
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बोलो जय महाकाल …

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** क्षिप्रा मैया से चले मिलने कालों के काल। झूमें नाचे गाये भक्त बजाए झाँझ करताल। बोलो जय महाकाल … बोलो जय महाकाल … पुत्र गणपति खड़े है लेके फूलों की माल। हर्षिद्धी माँ आई लेके आरती की थाल। बोलो जय महाकाल … बनी दुल्हनियाँ अवन्तिका बढ़ गई उसकी शान। क्षिप्रा जी के तट पर आज उड़े रे गुलाल। बोलो जय महाकाल … कर सोलह सिंगार ओढ़ चुनरियाँ लाल। चरण पखारे क्षिप्रा मैया आज हुई रे निहाल। बोलो जय महाकाल … हरि से मिलने आए बाबा पालकी में विशाल। हर्षित होकर मिले गले से मदन गोपाल। बोलो जय महाकाल … दर्शन देने निकले प्रजा को बाबा महाकाल। नगर भ्रमण कर जाने बाबा भक्तों के हाल। बोलो जय महाकाल … परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी. निवासी : उज...
लागी लगन …
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लागी लगन …

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** मन मीत मेरे मन भावन की लागी लगन शरण तेरी आवन की मन मीत …. ये दुनियाँ है गहरा सागर भर न सका कोई पूरी गागर जीवन पथ की इन उलझन में मिली छाँव किसे सावन की मन मीत …. बन्दे जितने भेजे जगत् में देकर अपनी वाणी सबने अपने मन मत से तेरी महिमा बखानी मतभेदों की इस दुनिया में भटक रहा है प्राणी तेरी रचना तू ही जाने कौन विधि तुझे पावन की मन मीत …. झूठी है ये जगत् की माया नैनों ने अब तक मुझे भरमाया परिणति है ये तेरी कृपा की मन चाहत हरि गुण गावन की मन मीत…. परिचय :- कमल किशोर नीमा पिता : मोतीलाल जी नीमा जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६ शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी. निवासी : उज्जैन (मध्य प्रदेश) रुचि : आपकी बचपन में व्यायाम शाला में व्यायाम, क्षिप्रा नदी में तैराकी और शिक्षा अध्ययन के साथ कविता, गीत, नाटक लेखन मंचन आदि में ग...