नहीं कुछ कहता मैं भी
शत्रुहन सिंह कंवर
चिसदा (जोंधरा) मस्तुरी
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नहीं कुछ कहता मैं भी
लिए हो हाथ में जो तुम कुल्हाड़
करों जो तुम चाहो अपनी मनमानी
मैंने दिया है तुझको क्या क्या
लेकिन दिया है तुमने मुझे ये क्या
कर दिया जो तुमने मुझे बलिदान
स्वार्थ के जो तुमने बीज अपनाया
प्रेमभाव जलसिंचित जो किया
किया तो अपनी स्वार्थ मनोरथ के लिए
निर्जीव गूंगा जो जानकर
कर दिया अपनी क्रोध का भांडाभाड़
हो ना सका मातृभूमि का नव श्रृंगार
कर दिया जो तुमने मुझे बलिदान।
परिचय :- शत्रुहन सिंह कंवर
निवासी : चिसदा (जोंधरा) मस्तुरी
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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