वर्षा की बूंदे
रतन खंगारोत
कलवार रोड झोटवाड़ा (राजस्थान)
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काले-काले मतवाले बादल,
वर्षा का पैगाम है लाये।
उमड़-घूमड़ और इठलाकर,
प्रेम का यह संदेश सुनाये।।१।।
आते-जाते जब बादल गरजे,
बिजली भी अपना रूप दिखाए।
गरज और चमक जब मिले साथ में,
मानव-जन और हर जीव घबराए।।२।।
अद्भुत, छटा निराली इसकी,
कभी प्रेम तो कभी डर लग जाए।
छमक-छमक कर मोर नाचे,
बूंदें ऐसी की हीरे और मोती बिखराए।।३।।
वर्षा की बूंदे जब धरा से मिली,
कण-कण उसका महका गया ।
ऐसी छटा बिखरी नभ में,
कोयल, पपिहा गीत है, गाये।।४।।
हरियाली की चुनर ओढ़े,
प्रकृति ने सोलह शृंगार किये।
अदभुत, अनोखा रूप इसका,
वर्षा के संग-संग जिए ।।५।।
परिचय : रतन खंगारोत
निवासी : कलवार रोड झोटवाड़ा (राजस्थान)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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