होली गीत
रशीद अहमद शेख 'रशीद'
इंदौर म.प्र.
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नित नूतन परिधान पहनकर,
सृजित करे रंगोली है।
प्रकृति सतत अनुपम विधियों से,
खेल रही शुभ होली है।
सूरज की सोने-सी किरणें,
चारु चाँदनी रजत लगे।
विस्मित विस्फारित नयनों को,
नैसर्गिक सौंदर्य ठगे।
कभी तिमिर तो कभी उजाला,
अद्भुत आँख मिचोली है।
प्रकृति सतत अनुपम विधियों से,
खेल रही शुभ होली है।
इन्द्रधनुष सातों रंगों से,
अपनी शोभा बिखराए।
रंग नहीं कम अंबर में भी,
धरती को यह दिखलाए।
बादल गरजें, बिजली चमकें,
वर्षा करे ठिठोली है।
प्रकृति सतत अनुपम विधियों से,
खेल रही नित होली है।
कानन में फूले पलाश हैं,
उपवन-उपवन सुमन खिले।
खेतों में सरसों है पीली,
नए-नए पत्ते निकले।
मनमोही व्यापक होली से,
सबकी काया डोली है।
प्रकृति सतत अनुपम विधियों से,
खेल रही शुभ होली है।
परिचय - रशीद अहमद शेख 'रशीद'
साहित्यिक उपनाम ~ ‘रशीद’
जन्मतिथि~ ०१/०४/१९५१
जन्म स्...























