नफरत
ममता श्रवण अग्रवाल (अपराजिता)
धवारी सतना (मध्य प्रदेश)
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इतनी नफरत क्यों है मन में,
क्या इसका है परिणाम जानना।
एक अकेला जब बचेगा तू,
तब होगी तुझे असह्य वेदना।।
स्वर्ण महल में बैठ कर भी,
नही मिलेगी तुझे शीतलता।
व्यग्र रहेगा हर पल तब तू,
जब तुझे सतायेगी नीरवता।।
मेवों, मिष्ठानों, पकवानों से,
कभी न मिटती क्षुधा उदर की।
मिटती क्षुधा सदा अन्न से,
और तृप्ति भी मिलती मन की।।
नफरत तो है जहर इक ऐसा,
जिससे रिश्तों में बढ़ जाए दूरी।
और अतृप्ति के आ जाने से,
कभी न हों इच्छायें पूरी।।
अतः मिटाये अब हम नफरत,
और सब में बांटे अपना प्यार।
नफरत से बढ़ती है नफरत,
और प्यार से बढ़ता प्यार।।
परिचय :- ममता श्रवण अग्रवाल (अपराजिता)
निवासी - धवारी सतना (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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