रस्सियों पर झूमता नट यह बजट
भीमराव झरबड़े 'जीवन'
बैतूल मध्य प्रदेश
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रस्सियों पर झूमता नट यह बजट।
बस टटोले वोट के तट यह बजट।।१
आम जन को है नहीं राहत कहीं,
बस लगाता जेब पर कट यह बजट।।२
आय को करने कृषक की दोगुनी,
खेत को ही कर गया चट यह बजट।।३
मात्र वेतन भोगियों के पेट पर,
मारता है जोर से बट यह बजट।।४
बोझ लादे आमजन के पीठ पर,
भर रहा धनवान के घट यह बजट।।५
फाड़ कर आंदोलनों की कापियाँ,
कुर्सियों का लिख रहा हट यह बजट।।६
पक गए हैं खंजरों के खेत जो,
दर्द की अब सुगबुगाहट यह बजट।।७
परिचय :- भीमराव झरबड़े 'जीवन'
निवासी- बैतूल मध्य प्रदेश
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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