राखी का त्यौहार
माधुरी व्यास "नवपमा"
इंदौर (म.प्र.)
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घिर आये बदरा है, झूम उठा ये मनवा हैं,
रिमझिम बरसी फुहार है, आया राखी का त्यौहार है।
बीरा ने खुशियों की बारिश की है,
भावज की पायलिया छनक उठी है,
उमंगों से भरा आया घर और द्वार है।
आया राखी का त्यौहार है।
भाई-बहनों के न्यारे रिश्ते है,
माता के आँचल में आज सिमटे है,
प्रेम बंधन में बंधे सब आज है।
आया राखी का त्यौहार है।
बहना ने भैया से अरज ये की है,
प्रेम से अखियाँ की डिबिया भरी है,
खूब लुटाया, बाबा ने लाड़ है।
आया राखी का त्यौहार है।
छोटी सी रेशम की ये डोरी है,
इसमे ही रिश्तों कि आस बंधी है,
अनोखा ये बंधन, न्यारा ये प्यार है।
आया राखी का त्यौहार है।
कोरोना ने कैसी ये पीड़ा दी है,
मन में यादों की झड़ियाँ लगी हैं,
यादों की लड़ियों में बीता दिन आज है।
आया राखी का त्यौहार है।
घिर आये बदरा है, झूम उठा ये मनवा है,
रिमझिम बरसी फुहार है, आय...

























