दिवास्वप्न
सरिता देराश्री
पिपलोदा, रतलाम, मध्य प्रदेश
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जीवन एक दिवास्वप्न सा है,
खुली आंखों से देख कर भी,
सब कुछ अनदेखा सा है।
जीवन एक दिवास्वप्न सा है।।
मचलती आशाएं, बहती भावनाएं,
पल-पल निश्चल झरने सा है।
जीवन एक दिवास्वप्न सा है।।
दर्द है, तड़प है, वीरह है,
फिर भी अल्हड़ बचपन सा है।
जीवन एक दिवास्वप्न सा है।
सुख-दुख, सम्मान और अरमान,
कुछअधूरी कुछ पूरी उम्मीद सा है।
जीवन एक दिवास्वप्न सा है।।
कभी उतार-चढ़ाव कभी मोड़ है,
कभी उलझन कभी सुलझा सा है।
जीवन एक दिवास्वप्न सा है।।
ऊंचे पहाड़, गहरी घाटी, मैदान,
सागर सा गहरा कभी चंचल सरिता सा है।
जीवन एक दिवास्वप्न सा है।।
परिचय :- सरिता देराश्री
पति : मंगलेश देराश्री
जन्म : ३/५/७९
शिक्षा : बी. एस . सी , एम . ए
निवासी : पिपलोदा, रतलाम, मध्य प्रदेश
आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फ...

























