मकर संक्रांति
श्रीमती शोभारानी तिवारी
इंदौर म.प्र.
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मकर संक्रांति का पर्व आया
मिलजुलकर पर्व मनाएंगे।
तिल गुड़ की मीठास संग,
हम खुशी जताएंगे।
मौज-मस्ती करेंगे हम,
मन में विश्वास जगायेंगे,
रंग बिरंगी पतंग डोर संग,
आसमान में उड़ाएंगे।
स्वर्णिम किरणों को छूने,
लहराकर ऊपर चढ़ जाए,
इंद्रधनुष रंगों में रंगकर,
तूफानों में नाच दिखाएं।
मंजिल का तो पता नहीं,
नील गगन की रानी कहलाए,
आसमान में बेखबर,
आजादी संग उड़ती जाए।
जब जब पेच लड़ा वह भी ,
लड़ने में जुट जाए ,
कट जाए या लूट जाए ,
तो वह निराश हो जाए।
ऊंचाइयों का सपना,
दिल ही दिल में रह जाता,
अपने अस्तित्व को बचाने,
फिर से धरती पर आ जाए।
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परिचय :- श्रीमती शोभारानी तिवारी इंदौर म.प्र.
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