क्या कोई जानता है
संजय जैन
मुंबई
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जन्म से पहले और
मृत्यु के बाद,
क्या किसीको कोई जानता है?
ये प्रश्न दुनियां बनाने वाले ने,
हर किसी के मन में उलझाया है।
और जीवो को उनकी शैली अनुसार,
जीने का तरीका सिखलाया है।
और इस भू-मंडल में सभी को,
स्वंय की करनी के अनुसार उलझाया है।।
जन्म से लेकर बोलने तक,
मन ह्रदय पवित्र होता है।
फिर मायावी लोगो का,
खेल शुरू होता है।
किसको क्या बुलवाना है,
और ध्यान केंद्रित किस पर कराना है।
जो कहा न सके सीधे सीधे,
वो बात बच्चो से बुलबाते है।
और अपना उल्लू सीधा करवाते है।।
वाह री दुनियां और इसे बनाने वाले,
क्या तूने दुनियां बनाई है।
रिश्तों का अंबार लगाया,
फिर अपास में लड़वाया।
देख तमाशा इस दुनियां का,
फिर कैसे रिश्तों को धूल चटवाया।
सारी हदें पार करा दी,
जब बेटा-बेटी को माँ बाप से,
भाई बहिन को अपास में खूब लड़वाता है।।
तभी तो कहते है
जन्म से पहले,
और मृत्यु...





















